आध्यात्मिक गुरु भय्यू महाराज आत्महत्या केस में इंदौर जिला कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। भय्यू महाराज को ब्लैकमेल कर उन्हें आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी पाते हुए जिला अदालत ने उनकी बेहद करीबी 28 वर्षीय शिष्या पलक, मुख्य सेवादार विनायक और ड्राइवर शरद को दोषी ठहराते हुए छह-छह साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र सोनी ने आध्यात्मिक गुरु की आत्महत्या के हाई.प्रोफाइल मामले में पलक पौराणिक, विनायक दुधाड़े और शरद देशमुख को भारतीय दंड विधान की धारा 120-बी आपराधिक साजिश, धारा 306 आत्महत्या के लिये उकसाना और धारा 384 जबरन वसूली के तहत दोषी करार देते हुए यह सजा सुनाई।
अधिकारियों ने बताया कि भय्यू महाराज ने इंदौर के बायपास रोड स्थित अपने बंगले में 12 जून 2018 को अपने लाइसेंसी रिवॉल्वर से गोली मारकर कथित रूप से आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने बताया कि पुलिस ने इस सनसनीखेज घटना के 7 महीने बाद पलक पौराणिक के साथ आध्यात्मिक गुरु 2 विश्वस्त सहयोगियों-विनायक दुधाड़े और शरद देशमुख को गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार पलक, भय्यू महाराज पर आपत्तिजनक चैट और अन्य निजी वस्तुओं के बूते उन पर शादी के लिये कथित रूप से दबाव बना रही थी, जबकि आध्यात्मिक गुरु पहले से शादीशुदा थे।
पुलिस ने भय्यू महाराज के घर से छोटी.सी डायरी के पन्ने पर लिखा सुसाइड नोट बरामद किया था। इसमें उन्होंने लिखा था कि वह भारी तनाव से तंग आकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर रहे हैं।

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