April 19, 2026

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महाकुंभ में कोरोना का महाविस्फोट, उत्तराखंड में श्रद्धालु कम फिर भी संक्रमण का डर

Uttrakhand : उत्तराखंड में चल रहे महाकुंभ (Mahakumbh) में कोरोना विस्फोट (Corona Blast) हुआ है। यहां अप्रैल 10-14 के बीच 2167 तीर्थयात्री और साधु कोरोना संक्रमित पाये गये हैं। बता दें कि मेले में कई धार्मिक संगठन के प्रमुखों ने कोरोना टेस्ट कराने से इंकार कर दिया था। नतीजा ये है कि अब मेले में हालात बेहद खराब हो सकते हैं। वहीं, इस दौरान कोरोना गाइडलाइन्स का पालन नहीं किया जा रहा है। ना तो मास्क दिख रहा है और ना ही सोशल डिस्टेंसिंग का ही पालन किया जा रहा है। इससे देखते हुए कुंभ मेला को 2 हफ्ते पहले खत्म किया जा सकता है।

उत्तराखंड सरकार और धार्मिक नेताओं के बीच चर्चा के बाद यह फैसला लिया गया है। गंगा नदी के तट पर होने वाले वार्षिक कार्यक्रम में नदी में डुबकी लगाने के लिए हजारों की संख्या में लोग पहुंचे हुए हैं। इसने देशभर में कोरोना के मामले बढ़ाने को लेकर चिंता बढ़ा दी थी। हरिद्वार के मुख्य चिकित्साधिकारी शंभु कुमार झा ने कहना है कि इस संख्या में श्रद्धालुओं और विभिन्न अखाड़ों के साधु-संतों की हरिद्वार से लेकर देवप्रयाग तक पूरे मेला क्षेत्र में 5 दिनों में की गई आरटी-पीसीआर और रैपिड एंटीजन जांच दोनों के आंकड़े शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि अभी और आरटी-पीसीआर जांच के नतीजे आना बाकी हैं और इस परिस्थिति को देखते हुए कुंभ मेला क्षेत्र में संक्रमित व्यक्तियों की संख्या 2000 के पार निकलने की पूरी आशंका है। हरिद्वार, टिहरी और ऋषिकेश सहित देहरादून जिले के विभिन्न भागों में 670 हेक्टेयर क्षेत्रफल में महाकुंभ क्षेत्र फैला हुआ है। सोमवार को सोमवती अमावस्या तथा बुधवार को मेष संक्रांति और बैसाखी के पर्व पर हुए दोनों शाही स्नानों में गंगा में डुबकी लगाने वाले 48.51 लाख श्रद्धालुओं में से ज्यादातर लोग बिना मास्क पहने और सामाजिक दूरी रखने जैसे कोविड से बचाव के नियमों का उल्लंघन करते नजर आए।

वहीं निर्वाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर कपिल देव का संक्रमण से निधन हो गया। वह मध्यप्रदेश के चित्रकूट से कुंभ में शामिल होने के लिए हरिद्वार गए थे। पॉजिटिव होने के बाद से उनका देहरादून के कैलाश हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था। हॉस्पिटल मैनेजमेंट के अनुसार बुधवार को उनका निधन हो गया। कुंभ के दौरान संक्रमण से जान गंवाने वाले कपिल देव पहले बड़े संत हैं।

कुंभ मेला के महानिरीक्षक संजय गुंज्याल ने बुधवार को बताया कि कुंभ के दौरान बैसाखी शाही स्नान के मौके पर सभी 13 अखाड़ों ने पवित्र स्नान किया। 1974 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है। बैसाखी के स्नान को सभी 4 शाही स्नान में सबसे बड़ा माना जाता है। 2010 में इसके लिए 1.60 करोड़ लोग पहुंचे थे। इसके मुकाबले इस बार लगभग 6 लाख लोग ही इसमें शामिल हुए।

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