स्वामी आत्मबोधानंद ने 194 दिन बाद अपना अनशन तोड़ दिया। उन्होंने गंगा बचाओ को लेकर पिछले साल 24 अक्टूबर को अनशन शुरू किया था। रविवार को हरिद्वार की एसडीएम कुसुम चौहान और अधिकारियों की मौजूदगी में जूस पीकर अनशन तोड़ा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के निदेशक राजीव रंजन ने 25 अप्रैल को मुझसे मुलाकात की थी। उन्होंने इस मामले पर स्वीकृति पत्र देते हुए कहा था कि गंगा में खनन पर रोक लगाई जाएगी।
स्वामी ने कहा कि सरकार और एनएमसीजी की ओर से सकारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं, इसलिए मैं अपना अनशन तोड़ रहा हूं। वे पिछले साल 24 अक्टूबर से अनशन पर थे। उन्होंने 19 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मामले पर संज्ञान लेने के लिए पत्र भी लिखा था। 26 वर्षीय आत्मबोधानंद कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएट हैं। वे 21 साल की उम्र में संन्यास लेकर मातृसदन से जुड़ गए थे। गंगा को बचाने के लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया। इसके पहले गंगा बचाव की मांग को लेकर पर्यावरणविद् जीडी अग्रवाल भी अनशन पर बैठे थे, लेकिन 111वें दिन उनका निधन हो गया था। उन्हें स्वामी सानंद के नाम से भी जाना जाता था।
आत्मबोधानंद ने 194 दिन बाद गंगा के लिए सरकार के आश्वासन पर अनशन तोड़ा

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