April 22, 2026

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गोर-गोर गोमती के साथ हुई गणगौर पूजा

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को गणगौर तीज उत्सव मालवा-निमाड़ क्षेत्र में बड़ी धूमधाम से मनाया गया। इस दिन विशेष रूप से माता पार्वती और भगवान शंकर की पूजा की जाती है। गणगौर राजस्थान के प्रमुख पर्व है, जिसे पूरी श्रद्धा एवं परंपरा के साथ मनाया जाता है। मान्यता है कि कुंवारी कन्याएं अच्छे वर और विवाहित महिलाएं सुहाग की रक्षा के लिए पूजा करती हैं।
यह त्योहार 16 दिनों का होता है। जहां लड़कियां होली में शादी के बाद मायके आकर इस त्योहार को बड़े धूमधाम से मनाकर अपने सुहाग की मंगलकामना करती हैं। अतः सुहागिनें भी उन्हीं के साथ प्रमुख पूजा में सहयोग कर अपने परिवार और पति की लंबी आयु की कामना करती हैं।
गणगौर पर परम्परागत गीतों के साथ ईसर याने कि शिव और गौरा याने कि पार्वती का पूजन किया जाता है। गणगौर के आखरी दिन फूलपाती या प्रोसेशन निकाला जाता है, जिसमें एक लड़की दूल्हा बनती है और दूसरी दूल्हन। जिनका स्वागत लोगों द्वारा शिव-पार्वती के रूप में किया जाता है।

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