जलगांव। महाराष्ट्र की एक अदालत ने 2009 के एक अपहरण और वसूली मामले में पुलिस अधीक्षक रैंक के अफसर मनोज लोहार और एक अन्य साथी को उम्रकैद की सजा सुनाई। मनोज वर्तमान में होमगार्ड डिपार्टमेंट में वरिष्ठ प्रशासनिक पद पर पदस्थ था। मामले में सजा पाने वाला दूसरा व्यक्ति धीरज यावले मनोज का रिश्तेदार है।
जलगांव के जिला एवं सत्र अदालत के जज पीवाय लाडेकर ने मामले में सुनवाई करते हुए उम्रकैद की सजा के साथ प्रत्येक आरोपी पर 5-5 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया।
लोहार 2009 में जलगांव जिले के चालीसगांव में अपर पुलिस अधीक्षक रहे थे। इस दौरान उन पर स्थानीय जिला परिषद सदस्य उत्तम महाजन का अपहरण करने और 25 लाख रुपये फिरौती मांगने का आरोप लगा था। अभियोजन पक्ष के अनुसार सब इंस्पेक्टर विश्वराव निंबालकर ने महाजन का अपहरण किया था। 30 जून 2009 को वह महाजन को लेकर लोहार के ऑफिस गया था।
आरोप था कि लोहार ने अपने ऑफिस सहित दो अन्य जगहों पर करीब 3 दिन तक उत्तम महाजन को बंधक बनाकर रखा।
एसपी रैंक के अफसर को अपहरण केस में उम्रकैद की सजा

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