April 24, 2026

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वर्जिन विमान से छोड़ेगा रॉकेट कॉस्मिक गर्ल, इससे 20 गुना तेज होगी गति

विभिन्न अंतरिक्ष एजेंसियां जमीन से रॉकेट के जरिये पृथ्वी की कक्षाओं में उपग्रहों को लॉन्च कर रही हैं। हालांकि एक रॉकेट को लॉन्च करने के लिए कई संसाधनों के साथ-साथ समय की आवश्यकता होती है। रिचर्ड ब्रैनसन की वर्जिन ऑर्बिट इसे आसान बनाना चाहती है। यही कारण है कि वे एक ऐसी प्रणाली पर काम कर रही है जो रॉकेट को सस्ता और जल्द लॉन्च कर सकता है। इसके जरिये जल्द राकेट पहली उड़ान भरने जा रहा है। इस योजना में एक रॉकेट को शामिल किया गया है, जिसे लॉन्चर वन कहा जाता है, जो वर्जिन अटलांटिक बोइंग 747-400 विमान के पंखों के नीचे रखा जाता है। पारंपरिक रॉकेट के विपरीत यह विमान 30 हजार फीट तक जाएगा और लॉन्चर वन इसे उड़ान के दौरान अंतरिक्ष में छोड़ेगा। कक्षा में उड़ान भरने के दौरान उपग्रह की गति आवाज से 20 गुना ज्यादा होगी। इसके जरिये व्यावसायिक और सरकारी उपभोक्ताओं को लक्षित किया गया है। इसकी लागत करीब 6.6 मिलियन पाउंड है। लांचर वन 70 फीट लंबा है। एक बार ईंधन भरने के बाद राकेट का वजन 57,000 पाउंड या 25,800 किलो है, जो 25 छोटी फेमिली कारों के बराबर है। लांचरवन को कंपनी द्वारा छोटे उपग्रहों के रूप में एक किफायती सवारी के रूप में तैयार किया गया है। इसमें व्यावसायिक और सरकारी उपभोक्ताओं को टारगेट किया गया है। वर्जिन ऑर्बिट का जिस विमान का उपयोग कर रहा है, वह प्रमाणित रूप से भारी भरकम या दैत्याकार नहीं है, जिसका उपयोग आप हवाई अड्डे पर करते हैं। वर्जिन अटलांटिक ने अपने बोइंग 747-400 विमान में से एक को इस प्रोजेक्ट में प्रयोग के लिए लिया है, जिसे कॉस्मिक गर्ल कहा जाता है। इसे रॉकेट के साथ लॉन्च करने के लिए बड़ा बदलाव किया गया है। विमान के भीतर से सीटों, अतिरिक्त सजावट और अनावश्यक सब कुछ को हटा दिया गया है, जिसका विमान उपयोग नहीं करेगा। इंजीनियरों ने रॉकेट को पकड़ने और लांच के लिए उपयोगी बनाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ-साथ विमानों की गति में भी बदलाव किया है। यह कॉस्मिक गर्ल को दुनिया का पहला विमान वाणिज्यिक ग्रेड रॉकेट के रूप में सक्षम बनाता है। वर्जिन ऑर्बिट का कहना है कि वे 24 घंटे के भीतर अधिकांश हवाई अड्डों से कक्षाओं में सेटेलाइट लॉन्च कर सकते हैं। इस प्रोजेक्ट ने अभी तक पहली उड़ान नहीं भरी है। वर्जिन ऑर्बिट को पहले प्रयास पर सफलता प्राप्त करने की उम्मीद है। यदि यह प्रोजेक्ट सफल हो जाता है तो पृथ्वी की कक्षा में हल्का अंतरिक्ष उपकरण वितरित करने वाली विभिन्न एजेंसियों के लिए यह एक सस्ता और तेज़ विकल्प हो सकती है।

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