April 24, 2026

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सपाक्स बनेगी राजनीतिक पार्टी, लाखों कार्यकर्ताओं के बीच की घोषणा

सपाक्स अधिकारी कर्मचारी संघ, सपाक्स युवा संगठन एवं सामान्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक समाज संस्था के संयुक्त आह्वान पर प्रदेश के सभी जिलों से लाखों लोगों ने आज भोपाल में उपस्थित होकर शक्ति प्रदर्शन किया। सरकार के कई अवरोधों जिनमें 17 ट्रेनों को रोकना, 200 से अधिक बसों को सीहोर से पहले रोकना, कर्मचारियों को जबरन चुनाव ड्यूटी में लगाना और उन्हें डराना, कार्यक्रम स्थल पर इंटरनेट सेवा को बंद करने के बावजूद लोगों को भोपाल आने से सरकारें रोक नहीं पाईं। सपाक्स 2 अक्टूबर को राजनीतिक पार्टी बन जाएगी। यह घोषणा सपाक्स के संरक्षक हीरालाल त्रिवेदी ने रविवार को कलियासोत एडवेंचर ग्राउंड पर आयोजित सपाक्स की क्रांति रैली में मौजूद लाखों कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में की। रैली में प्रदेश भर से आए कार्यकर्ताओं और वक्ताओं ने प्रमोशन में आरक्षण, एट्रोसिटी एक्ट सहित कई मुद्दों पर केन्द्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ हुंकार भरी। रैली को अनारक्षित वर्ग के अलावा आरक्षित वर्ग का भी समर्थन प्राप्त हुआ। सतना जिले से पूर्व विधायक धीरेन्द्र सिंह धीरू, कमल पासवान, सागर की किन्नर पूर्व महापौर कमला मौसी ने भी सपाक्स को समर्थन दिया है।
रैली में राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामड़ी ने कहा कि सपाक्स प्रदेश में सवर्णों सहित सभी समाज के हित में अच्छा काम कर रही है। इस कारण उनके संगठन ने आगामी चुनाव में सपाक्स को पूर्ण समर्थन देने का ऐलान किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को फेंकू बताते हुए कहा कि उनके द्वारा धारा 370 हटाने का वादा किया गया था, पर गलती से धारा 377 हटा दी। इसी प्रकार गलती से धारा 497 हटा दी और सवर्णों के लिए नया एट्रोसिटी एक्ट बना दिया। प्रधानमंत्री मोदी से आगे बढ़कर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान निकले, जिन्होंने प्रदेश के सवर्णों को माई का लाल कहकर ललकार दिया। ये माई के लाल अब विधानसभा और लोकसभा चुनाव में दोनों नेताओं को बता देंगे कि माई के लालों में कितनी ताकत है।
सतना जिले के पूर्व अजा वर्ग के विधायक धीरेन्द्र सिंह धीरू ने कहा कि मैं सामान्य सीट से जिला पंचायत अध्यक्ष रहा और सामान्य वर्ग सहित सभी वर्गों के वोटों से मैं विधायक बना। उन्होंने सपाक्स की नीतियों का समर्थन करते हुए राजनीतिक दलों के द्वारा किए जा रहे समाजों को बांटने की नीति का विरोध किया।

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