April 18, 2026

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चैत्र नवरात्रि के पहले दिन माता के मंदिरों में लगा भक्तों का ताता, यह जुड़ी है विक्रमादित्य की अनोखी कहानी

आज चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू हुई माता की 9 दिवसीय आराधना की धूम पुरे देश में देखी जा रही है। चेत्र नवरात्री के शुरू होने के साथ माता के भक्तो की चहल-पहल बढ़ने तथा नवरात्री के उपवास का दौर भी शुरू हो गया है। चेत्र नवरात्री के दौरान सभी देवी मंदिरों में विशेष तैयारी की गई है। 52 शक्तिपीठ में से एक, उज्जैन के हरसिद्धि माता मंदिर पर भी नवरात्री के दौरान विशेष तैयारियां की गई है। नवरात्री के प्रारम्भ में माता हरसिद्धि का विशेष श्रंृगार किया गया जिसके पश्चात माता की महाआरती की गई।
52 शक्तिपीठ में से एक, उज्जैन के हरसिद्धि माता मंदिर पर भी नवरात्री के दौरान विशेष तैयारियां की गई है। नवरात्री के प्रारम्भ में माता हरसिद्धि का विशेष श्रंृगार किया गया जिसके पश्चात माता की महाआरती की गई। आरती के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन करने हेतु मौजूद थे। आरती के पश्चात माता के भक्तो ने कतार में लगकर माता के आलोकिक रूप के दर्शन किये एवं नवरात्री के प्रथम दिन माता से आशीर्वाद प्राप्त किया। उज्जैन की माता हरसिद्धि, राजा विक्रमादित्य की कुलदेवी होने के कारण भी उज्जैनवासियो के लिए इस स्थान का प्रमुख महत्व है। 52 शक्तिपीठ में से हरसिद्धि माता मंदिर भी एक शक्तिपीठ है, यहाँ माता की कोहनी गिरने से शक्तिपीठ का निर्माण हुआ है।
हरसिद्धि माता मंदिर, शक्तिपीठ होने के कारण यहाँ शहर के अलावा देशभर से भी माता के दर्शन करने हेतु श्रद्धालु पहुंचते है। मान्यता है की यहाँ माता के दर्शन करने मात्र से सभी दुःख, तकलीफों से निजात मिल जाती है। मंदिर में नवरात्री के दौरान विशेष हवन और पूजन भी किया जाता है। शक्तिपीठ हरसिद्धि मंदिर में सुबह घट स्थापना कार्य शुरू हुआ। घटस्थापना के पश्चात विशिष्ट आरती की गई। यह वह देवी हैं जो राजा विक्रमादित्य की आराध्य थीं और राजा अमावस की रात को विशेष पूजा अनुष्ठान कर अपना सिर चढ़ाते थे, मगर हर बार देवी उनके सिर को जोड़ देती थीं।

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