अखाड़ा परिषद की बैठक में 13 अखाड़े के सदस्य अध्यक्ष पंहुचे। नरेंद्र गिरि सहित महा मंत्री हरी गिरी भी उज्जैन आये। अधूरे निर्माण पूरे कराने का मुद्दा और नीलगंगा पड़ाव स्थल पर सभी 7 शैव अखाड़ों के लिए जमीन देने का प्रस्ताव पर चर्चा की गई। नीलगंगा पड़ाव स्थल पर शैव संप्रदाय के सभी 7 अखाड़ों के लिए जमीन तय की जा सकती है। अभा अखाड़ा परिषद इस जमीन को संरक्षित करने के साथ-साथ जमीन पर हो रहे अतिक्रमण और इलहाबाद कुम्भ को लेकर कई प्रस्ताव बैठक में रखे गए। सिंहस्थ में इस स्थान से ही अधिकतर अखाड़ों की पेशवाई निकलती है। लेकिन इस खाली जमीन पर लगातार हो रहे अतिक्रमण और बढ़ती बसाहट से साधु-संत चिंतित हैं। वे चाहते हैं जमीन का संरक्षण किया जाए ताकि सिंहस्थ में यहां से पेशवाई निकालने में जमीन की कमी महसूस न हो।
उज्जैन में आज एक बार फिर सिंहस्थ मेले का नजारा देखने को मिला बड़ी संख्या में साधू संत बैठक में शामिल हुए। उज्जैन में अखाडा परिषद् का पहला कार्यालय खुला। सिंहस्थ 2016 में भी नीलगंगा पड़ाव स्थल पर से अखाड़ों की पेशवाई निकाली गई थी। यह स्थान सिंहस्थ क्षेत्र के नजदीक है तथा शहर के बीच भी है। सिंहस्थ 2016 के पहले इस स्थान को विकसित करने पर राज्य सरकार ने करोड़ों रुपए खर्च किए थे। तालाब का जीर्णोद्धार करने के साथ मंदिरों और घाट का विकास कराया था। यहां भव्य प्रवेश द्वार और सौंदर्यीकरण भी किया गया। इसी के एक किनारे पर जूना अखाड़े की निजी जमीन पर अखाड़े की इमारत का निर्माण भी हो रहा है। इसलिए अब अखाड़ा परिषद इस जमीन की सुरक्षा के लिए बैठक में प्रस्ताव लेकर आई है। अभा अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरिजी महाराज का कहना है कि यहां शैव संप्रदाय के सभी 7 अखाड़ों को जमीन दी जा सकती है, ताकि वे यहां अपना स्थान बना सकें। इससे जमीन की सुरक्षा भी होगी। अतिक्रमण नहीं होगा। साथ ही इलहाबाद कुम्भ में स्नान सहित अन्य मामलों पर भी बैठक में चर्चा हुई।
अखाड़ा परिषद की बैठक में नीलगंगा पड़ाव स्थल पर हुई चर्चा

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