कोरोना के कारण सब सुनसान पड़ा था तो सभी देशों ने विचार किया क्यों ना महामूर्ख सम्मेलन का आयोजन किया जाए। सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि इस सम्मेलन में एक प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाएगा।
जो देश अपने आप को महामूर्ख साबित करेगा उसे प्रथम पुरस्कार दिया जाएगा। भारत कहां पीछे रहने वाला था उसने प्रतियोगिता में हिस्सा ले लिया। क्योंकि किसी दूसरे देश को क्या पता कि भारत में तो इस तरह के आयोजन होना आम बात है। भारत में एक शहर है इंदौर यहां होली पर टेपा उत्सव का आयोजन हर साल होता है और यहां के कवि हर कवि सम्मेलन में अपने आप को मूर्ख साबित करने की होड़ में एक से बढ़कर एक कविताएं सुनाते हैं।
वैसे इंदौर तीन बार समझदारी में अव्वल भी रहा है। चौथी बार भी ऐसा होने जा रहा था पर उसे यह समझदारी शायद रास नहीं आई। इसलिए अब उसने इस बार मूर्खता की सारी हदें ही पार कर दी। वैसे तो भारत में विशेष जाति के लोग भी अभी मूर्खता वाली हरकतें कर रहे हैं । इसलिए भारत को उम्मीद ही नहीं पूरा विश्वास था कि वह इस प्रतियोगिता में विजयी होगा। अब वह दिन भी आ गया जब प्रतियोगिता का श्रीगणेश किया किया गया।
पहले ही राउंड में बहुत से देश बाहर हो गए और फाइनल राउंड में पहुंचे चीन, अमेरिका ,पाकिस्तान,उत्तर कोरिया और भारत। फाइनल राउंड बड़ा कशमकश से भरा था कभी भी जीत फिसल कर प्रतिद्वंदी के पाले में जा सकती थी। पहले बारी आई चीन की चीन ने अपने आपको महामूर्ख साबित करते हुए कहा कि देखों हम हैं सबसे बड़े महामूर्ख आज जिस कोरोना से पूरी दुनिया डर रही है उसे हमने ही अपने यहां बनाया और लैब से बाहर निकाला था, और तो और जिन डॉक्टरों ने इसके बारे में हमें चेताया हमने उन्हें ही चुप करा दिया। है ना हम सबसे बड़े महामूर्ख।
पाकिस्तान बोला हमारे रहते तुम सबसे बड़े महामूर्ख कैसे हो सकते हो हमने तो हमारे यहां कोरोना पर ध्यान तक नहीं दिया बल्कि इस कोरोना से निपटने की जगह हमने भारत के ऊपर फिर से आंतकी हमला करा दिया। अब बताओ कौन है असली महामूर्ख अमेरिका बोला तुमसे बड़े महामूर्ख तो हम है हमनें तो कोरोना से ज्यादा फोकस आगामी प्रेसिडेंट चुनाव पर किया।
उत्तर कोरिया के राष्ट्रपति किम जोंग कहा चुप बैठने वालों मेसे थे बोले हटो तुम लोगों में से सबसे बड़े मूर्ख तो हम है हमने कोरोना से लड़ने की जगह सब जगह फैला दिया कि हमको ही कोरोना हो गया है और हम अंडरग्राउंड हो गए। अब आई बारी भारत की जिसका सभी को इंतजार था। भारत ने कहा हमारे रहते तुम लोग अपने आप को महामूर्ख साबित कर ही नहीं सकते तुम्हारे यहां तो तुम एक ही महामूर्ख हो हमारे यहां तो सवा सौ करोड़ भारतीय महामूर्ख है।
तीन -तीन बार लॉक डाउन लगाया पर मजाल है किसी ने उसका सख्ती से पालन किया हो। थूकना, पत्थर फेंकना ऐसा कोई काम है जो हमनें कोरोना को फैलाने के लिए नहीं किया हो। इतना ही नहीं आपने कहीं देखे होंगे ऐसे मूर्ख जो अपनी जान बचाने वाले डॉक्टरों का ही सिर फोड़ दे और अपनी रक्षा करने वाले पुलिस वालों का हाथ काट देते हैं।
जान जोखिम में डालकर शराब की लाइन में खड़े हो जाए। इतना सुनते ही निर्णायको ने अपना फैसला भारत के पक्ष में सुनाते हुए महामूर्ख का खिताब भारत के नाम कर दिया ।चीन अमेरिका, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया सभी प्रतिद्वंदी आज जीत से ज्यादा अपनी हार पर खुश थे। भारत के लोग इस खुशी का कारण समझ ही नहीं पाए आखिर महामूर्ख जो ठहरे…।
(यह एक काल्पनिक व्यंग है इसे केवल इसलिए लिखा गया है ताकि आप समय रहते संभल जाए.. प्रोफेसर वंदना जोशी)

More Stories
सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय कार्यपरिषद सदस्य डॉ. कुशवाह ने जन्मदिवस के अवसर पर सबसे पहले स्व गणना पोर्टल पर स्व गणना की
किसानों को गेहूँ विक्रय के लिये 30 अप्रैल तक स्लॉट बुकिंग की सुविधा : मंत्री राजपूत
CrPI सिस्टम/MCU के प्रभावी संचालन हेतु राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित