त्योहार लाता है खुशियां हजार,
हर कोई करता है खुुशी का इजहार,
चाहे हो नवरात्रि, नववर्ष, चेटीचंड, या रोजा
मनाता है ऐसी ही वह अपनी खुशियां,
नए वर्ष की शुभकामनाएं करते है प्रेषित
साथ कहते है गुड़ी उभारली आमी,
सूर्य को मिल देते है अर्ग
शाम को मिल कर करते है चांद का दिदार,
कहीं नहीं देखने मिलेगा इतना अपनापन और प्यार,
कोरोना ने तोड़ दी सारी दिवार,
अब आ गया है आपे से बाहर,
रोकना हमें ही है मिल कर इसे साथ,
लड़ना है कोरोना से जंग फिर आना है एक साथ,
बस नहीं लगाना है गले, नहीं मनाना है त्योहार साथ,
दिलों से करों एक दूसरे को याद,
कौन कितना करीब है बता देगा यह वक्त यार,
बस संभल जाओं इस बार त्योहार पर दो एक दूसरे को जीवन दान,
जितना रहोगें दूर होगें तुम दिल के पास उतना,
इस बार त्योहार कुछ ऐसे दिलों की नजदीकियों और शरीरिक दूरियों से मना लो ना यार,
सच कहते है आएगें फिर वहीं रंग वहीं त्योहार,
जब होगा हमारे हाथों रंग और तुम्हारें गालों पर मुस्कान,
कोरोना से मिल कर लड़ना है हमें,
जिन्दगीं को दिलों से जीतना है हमें,
दूरी है सबसे बड़ा उपाय, मिलकर सबकों वैक्सीन लगवान है हमें….
कहने को तो वह बंद दुकान भी जहां त्योहार पर होती थी भीड़,
पर त्योहार का मौका रूलाना नहीं हंसाना है, इसलिए इतने में समझ जाओं ना यार….
सभी को नवरात्रि, हिन्दू नववर्ष, चेटीचंड, गुड़ी पड़वा की हार्दिक शुभकामनाएं…
-हीना तिवारी, संपादक

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