उज्जैन के कालिदास अकादमी में 2 दिन के प्रदेश स्तरीय मालवा पत्रकारिता उत्सव का आयोजन किया गया। जिसमें पत्रकारिता का नया दौर मीडिया की लक्ष्मण रेखा और पत्रकारिता का नया दौर टूटता भरोसा, बढ़ता गुस्सा विषय पर चिंतन किया गया। पहले दिन कार्यक्रम में डॉ हिमांशु द्विवेदी प्रधान संपादक हरिभूमि, वरिष्ठ पत्रकार राकेश पाठक, राजेश बादल वक्ता के रूप में मौजूद रहे। मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव सांसद अनिल फिरोजिया और पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी शामिल हुए।
मालवा पत्रकारिता उत्सव में शहर के कई वरिष्ठ पत्रकारों का सम्मान किया गया। संस्था प्रेस क्लब द्वारा इस दौरान कई प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया जिसमें मुख्य रुप से प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के रिपोर्टर्स फोटोग्राफर को सम्मानित किया गया। उज्जैन में अच्छी रिपोर्टिंग करने के लिए रवि चंद्रवंशी, मनोज कुशवाह को प्रथम पुरस्कार दिया गया वहीं द्वितीय पुरस्कार धर्मेंद्र भाटी और संतोष कृष्णानी को दिया गया। कार्यक्रम में न्यूज प्रवाह की संपादक हीना तिवारी का भी सम्मान किया गया।
जीतू पटवारी पूर्व मंत्री जीतू पटवारी ने कहा की प्रेस जीवन मे जरूरी अंग है लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ है जो खबर दबाना पड़े वहीं खबर है, बाकी सब विज्ञापन है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री से पहले पत्रकार मिलते थे चाय पीकर आते थे, दूसरे दिन खूब निंदा छापते थे आजकल ये देखने को नहीं मिलता।
वरिष्ठ पत्रकार हिमांशु द्विवेदी ने कहा कि आज लक्ष्मण रेखा तय करेगा कौन। आज सब अपने आपको राम मानते है लक्ष्मण तो कोई खुद को मानता नही। कोई बताने वाला नही है सब लोग अपने दायित्त्व भूल गए दूसरों के दायित्व याद दिला रहे है। सत्य को आज कोइ स्वीकार नहीं कर रहा। आप लक्ष्मण रेखा की चिंता मत करो। आप पत्रकारिता करते चलो संयम आचरण में संयत होकर पत्रकारिता करो।
हम सब पत्रकार कटघरे में खड़े है आज अनेक परिवर्तन है चारो स्तम्भ कटघरे में है लोकतंत्र की पालकी 4 कहारों के कंधे पर है 2 कंधे तो यहां है मगर चारो कंधे डगमगाने लगे है। ये हमारी जिम्मेदारी है कि डगमगा न जाये। हमे कोई सुविधा नहीं कोई सुरक्षा नहीं कोई सहूलियत नहीं। बाकी तीनों स्तभ को ये सब सुविधाएं है। मगर पत्रकारिता के लिए कुछ नही है। गलत फैसले वालो जज के खिलाफ कोई ऐक्शन नहीं होता मगर पत्रकार गलत समाचार लिखे तो समाज का बड़ा नुकसान हो जाता है। लक्ष्मण रेखा तो कई पत्रकार कर ही रहे है अभी भी अघोषित आपातकाल से पत्रकारिता गुजर रही है।
वहीं दूसरे दिन रघुनंदन शर्मा बोले कि राष्ट्र के दायित्व को पूरा करने वाले ही असल पत्रकार होते है, मैने इसी हाल में एक बार मेरे साथी को घोषणा वीर कहा था, इतनी सी बात पर उज्जैन से भोपाल तक भुचाल आ गया, खूब खबरे छपी, म।ने नाम नही लिया, फिर भी नाम छाप दिया गया। साथ ही सीईओ सहारा समय उपेन्द्र राय ने बताया कि आने वाले समय में पत्रकारिता का स्तर कहा पहुंचेगा। वर्चुअल दुनिया में भी जमीनें खरीदें जाएगी। मुख्य रूप से यही चुनौती रहेगी।
वरिष्ठ पत्रकार परवेज अहमद ने बहुत ही सरल भाषा में अपनी बात रखी और पूराने दौर में और वर्तमान दौर में पत्रकारों में कैसा परिवर्तन आ गया है इस पर चर्चा की। वहीं वरिष्ठ पत्रकार रामशरण जोशी ने बताया कि आपातकाल की स्थिति अभी नहीं है। सभी को काम करना है। अपने वक्तत्व में उन्होंने कई राजनेताओं के नाम लिए, साथ ही राजेन्द्र माथुर जैसे पत्रकारों का उदाहरण देकर पत्रकारों के महत्व को बताया। साथ ही मध्यप्रदेश के कई वरिष्ठ पत्रकारों का सम्मान भी किया गया।

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