April 18, 2026

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महाकालेश्वर क्षेत्र के आस-पास होगा, इस तरह बनाई गई है 300 करोड़ की योजना

भगवान महाकालेश्वर क्षेत्र एवं नगर के विकास हेतु आज आयोजित की गई बैठक में 300 करोड़ रुपये की योजना की प्रारम्भिक स्वीकृति दी गई। अन्तिम स्वीकृति स्थानीय जनप्रतिनिधियों के निरीक्षण एवं सुझाव के बाद दी जायेगी। प्रभारी मंत्री सज्जनसिंह वर्मा ने कहा है कि आगामी अप्रैल माह तक रूद्र सागर में मिलने वाले गन्दे पानी को रोक दिया जाएगा। मुख्यमंत्री कमलनाथ के निर्देश पर प्रदेश के 3 कैबिनेट मंत्री जिनमें लोक निर्माण एवं प्रभारी मंत्री सज्जनसिंह वर्मा, जनसम्पर्क एवं विधि विधायी मंत्री पीसी शर्मा एवं नगरीय विकास एवं आवास मंत्री जयवर्धनसिंह शामिल थे, ने आज महाकालेश्वर मंदिर क्षेत्र में मंदिर के अंदर एवं बाहर किए जाने वाले कार्यों को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा की।
प्रारम्भिक रूप से 300 करोड़ की योजना में पहले फेज में 97 करोड़ 71 लाख रुपये की लागत से पार्किंग प्लाजा, मीडवे झोन एवं कंट्रोल रूम, फूड कोर्ट, महाकाल कॉरिडोर, 29.73 करोड़ की मल्टीलेवल पार्किंग, महाकाल परिसर के आसपास के 7 स्कूलों का प्रतिस्थापन 20.89 करोड़, हरिफाटक के आसपास के 3 स्कूलों का प्रतिस्थापन 5.5 करोड़ में किया जाएगा।
वहीं दूसरे फेज में महाराजवाड़ा कॉम्पलेक्स का विकास 27 करोड़, अन्नक्षेत्र एवं धर्मशाला का विकास 17 करोड़, रूद्र सागर के लेकफ्रंट का विकास 12 करोड़, रामघाट पर विकास कार्य 9 करोड़, टूरिस्ट इंफॉर्मेशन सेन्टर 7.5 करोड़, रूद्र सागर का शुद्धिकरण एवं पुनर्जीवन 18 करोड़, हरिफाटक ब्रिज का चौड़ीकरण एवं रेलवे अण्डरपास का निर्माण 36.5 करोड़ तथा विजिटर्स फेसिलिटी सेन्टर का निर्माण 30 करोड़ शामिल है।
बैठक में जनसम्पर्क एवं विधि विधायी मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि महाकालेश्वर मंदिर का नया एक्ट तैयार हो रहा है, जिसमें कई तरह के सुधार किए जा रहे हैं। इस एक्ट में नियम बनाने के अधिकार सरकार के पास होंगे। साथ ही मंदिर के प्रबंधन की व्यवस्था को भी ठीक किया जाएगा। जनसम्पर्क मंत्री ने कहा कि उज्जैन शहर का पौराणिक इतिहास है यहां की समृद्ध संस्कृति है। इन सभी बातों को ध्यान में रखकर प्रदेश के मुख्यमंत्री उज्जैन का विकास करना चाहते हैं।
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री जयवर्धन सिंह ने बैठक में जनप्रतिनिधियों के विचार सुनकर निर्णय लिया कि भगवान महाकालेश्वर के शिखर दर्शन में किसी तरह की बाधा उत्पन्न ना हो इसके लिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आसपास के भवनों की ऊंचाई शिखर से कम हो। इसके लिए अतिशीघ्र टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग द्वारा निर्देश जारी किए जाएंगे। नगरीय प्रशासन मंत्री ने निर्देश दिए हैं कि आगामी सितम्बर-अक्टूबर माह में कुछ जनप्रतिनिधियों को काशी विश्वनाथ मन्दिर, तिरूपति मन्दिर एवं सोमनाथ मन्दिर की व्यवस्थाओं का अवलोकन करने के लिए भेजा जाएगा।
बैठक में मुख्य सचिव श्री सुधिरंजन मोहन्ती ने कहा कि उज्जैन में आने वाले श्रद्धालु का विभाजन दो-तीन कैटेगरी में किया जा सकता है। इसमें कुछ लोग केवल एक दिन के लिए आते हैं एवं बाकी लोग एक-दो दिन रूकने के विचार से यहां आते हैं। ऐसे श्रद्धालुओं को विशेष सुविधा मिले एवं जो यहां केवल एक दिन के लिए आते हैं वे उज्जैन में रूकें इस हेतु मुख्यमंत्री के निर्देश पर कार्य योजना तैयार की जा रही है। सोमनाथ और अमृतसर में जिस तरह से इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल्स यात्रियों के परिवहन के लिए उपलब्ध कराए जा रहे हैं, वैसे यहां भी किया जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि मन्दिर के आसपास के क्षेत्र का विकास करते समय यह ध्यान में रखना होगा कि पर्याप्त मात्रा में खुला स्थान छोड़ा जाए, केवल सीमेन्ट-कांक्रीट के स्ट्रक्चर तैयार न किए जाएं। मुख्य सचिव ने कहा कि रूद्र सागर से गन्दगी हटाई जाएगी एवं भोपाल की तर्ज पर इसको स्वच्छ किया जाएगा। मुख्य सचिव ने कहा कि आज यह पहली बैठक हैए इसके बाद निरन्तर समीक्षा के लिए बैठकें आयोजित की जाती रहेंगी।

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