मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने महाराष्ट्र सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें कहा गया था कि महाराष्ट्र में कोरोना के मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए मध्य प्रदेश को ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं की जा सकेगी। इंदौर के महाराजा यशवंत राव याने कि एमवाय अस्पताल प्रबंधन ने महाराष्ट्र सरकार के 7 सितंबर के इस आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। बुधवार को कोर्ट की युगल पीठ ने महाराष्ट्र सरकार से जवाब भी मांगा है।
मध्य प्रदेश के अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली ऑक्सीजन का एक बड़ा हिस्सा महाराष्ट्र से आता है। कोरोना महामारी की वजह से प्रदेश में ऑक्सीजन की मांग बढ़ी है। कोरोना के प्रकोप के चलते महाराष्ट्र में भी इसकी मांग सामान्य से कई गुना बढ़ी है। इसकी मांग और आपूर्ति में आ रहे अंतर को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने ऑक्सीजन की आपूर्ति पर रोक लगा दी थी। महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि उनके यहां के मरीजों को ही ऑक्सीजन की पूर्ति नहीं हो पा रही है तो दूसरे प्रदेश के मरीजों के लिए आपूर्ति कैसे की जा सकती है।
महाराष्ट्र से ऑक्सीजन नहीं मिलने से मध्य प्रदेश के अस्पतालों में इसकी कमी होने लगी थी। ऐसे में महाराजा यशवंत राव अस्पताल प्रबंधन ने परेशानी को देखते हुए हाई कोर्ट की शरण ली। याचिका में तर्क दिया गया कि कोरोना का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में ऑक्सीजन की आपूर्ति को रोका नहीं जा सकता। याचिका में महाराष्ट्र सरकार के उक्त आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई। महाधिवक्ता पुरषेंद्र कौरव और अतिरिक्त महाधिवक्ता पुष्यमित्र भार्गव ने अस्पताल प्रबंधन की तरफ से पैरवी की।
उन्होंने कोर्ट के समक्ष तर्क रखा कि प्रदेश के आधार पर कोरोना के मरीजों में भेदभाव नहीं किया जा सकता। इसके बाद जस्टिस एससी शर्मा और जस्टिस शैलेंद्र शुक्ला ने महाराष्ट्र सरकार के आदेश पर रोक लगा दी। भार्गव ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि आगामी आदेश तक प्रदेश के अस्पतालों में महाराष्ट्र से ऑक्सीजन की आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी रहेगी। न्यायालय अब इस मामले में 19 अक्टूबर को सुनवाई करेगा।

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