राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष को शनिवार को लोकपाल प्रमुख के रूप में शपथ दिलाई। आधिकारिक बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति भवन में एक समारोह में शपथ दिलाई गई।
उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति घोष को 19 मार्च को देश के पहले लोकपाल के रूप में नियुक्त किया गया था। न्यायमूर्ति घोष मई 2017 में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। वह 29 जून 2017 से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य हैं। इन नियुक्तियों की सिफारिश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीत चयन समिति ने की थी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उसे मंजूरी दी। चयन समिति में पीएम मोदी के अलावा लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और भारत के मुख्य न्यायधीश जस्टिस रंजन गोगोई और प्रख्यात कानूनविद् मुकुल रोहतगी भी शामिल हैं।
लोकपाल और लोकायुक्त कानून के तहत कुछ श्रेणियों के सरकारी सेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिये केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्ति का प्रावधान है। यह कानून 2013 में पारित किया गया था। ये नियुक्तियां 7 मार्च को उच्चतम न्यायालय के अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल से 10 दिन के भीतर लोकपाल चयन समिति की बैठक की संभावित तारीख के बारे में सूचित करने को कहने के एक पखवाड़े बाद हुईं। न्यायालय के इस आदेश के बाद 15 मार्च को चयन समिति की बैठक हुई थी।
भारत के पहले लोकपाल जस्टिस पिनाकी घोष ने ली शपथ

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