यूँ तो दीपावली का त्यौहार पूरे देश में मनाया जाता है पर उज्जैन में दीपावली का विशेष महत्व है। दरअसल यहाँ दीपावली की शुरुआत भस्म रमाने वाले भूत भावन बाबा महाकाल के दरबार से होती है। सबसे पहले राजाधिराज बाबा महाकाल के दरबार में दीपावली मनती है उसके बाद पूरा देश दीपावली मनाता है। शनिवार को रूप चौदस के अवसर पर महाकाल के आंगन में परंपरा अनुसार दीपावली मनाई गई। यहाँ बाबा को गर्म जल से नहलाकर 56 भोग लगाया गया साथ ही फुलझड़ियाँ जलाई गई। महाकाल मंदिर में दीपावली मनाने की परम्परा खास है यहाँ रूपचवदस पर होने वाली भस्मारती के पहले बाबा महाकाल का चंदन से उबटन किया गया फिर सुगंधित सामग्री से स्नान कराया गया। यह स्नान अभयंग स्नान कहलाता है जो कि वर्ष में एक बार होता है। बाबा का अभयंग स्नान भी अपने आप में खास है। चूंकि दीपावली से ठण्ड की शुरुआत मानी जाती है इसलिए यहाँ सुबह बाबा महाकाल को गर्म जल से स्नान कराया जाता है
और गर्म जल से स्नान की यह प्रक्रिया महा शिवरात्रि तक प्रतिदिन जारी रहती है। दोपहर बाद से दीपावली पर्व की शुरआत होगी लेकिन बाबा महाकाल के दरबार मे अल सुबह होने वाले भस्मारती में फुलझड़ी से आरती की गई उसके बाद उज्जैन में दीपावली पर्व शाम को धूम धाम से मनाया जाएगा। दीपावली पर्व के एक दिन बाद पड़वा पर देश भर में होने वाले अन्नकूट के आयोजन की शुरुआत भी उज्जैन के बाबा महाकाल से ही होती है। उज्जैन में आज सुबह 4 बजे अन्नकूट का आयोजन किया गया, जिसमें 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग महाकाल को लगाया गया। आरती में पण्डे पुजारियों ने उत्साह के साथ फुलझड़ी जलाई गई और दीपावाली का जश्न मनाय गया । यूँ तो बाबा के दरबार में रोज भस्मारती होती हे पर आज की भस्मारती अन्य दिनों कि अपेक्षा कुछ विशेष रही।

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