मध्य प्रदेश में राज्यसभा की सीट को लेकर कांग्रेस में शुरू हुआ घमासान अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस से इस्तीफा देकर अपने समर्थक विधायकों संग बीजेपी के खेमें में पहुंच गए हैं। सिंधिया के इस कदम से कमलनाथ सरकार का बाहर होना लगभग तय हो गया है।
कांग्रेस से 18 साल का साथ छोड़कर ज्योतिरादित्य सिंधिया बीजेपी का हिस्सा बन रहे हैं। यह उनका दूसरा घर होगा जहां विजयराजे के बाद वसुंधरा और यशोधरा राजे सिंधिया अपना रुतबा काफी पहले बना चुकी हैं। सिंधिया परिवार का राजनीतिक सफर या यूं कहें कि संसदीय राजनीति का सफर विजयराजे सिंधिया से शुरू हुआ। उन्हें ग्वालियर राजघराने की राजमाता के नाम से भी जाना जाता है।
राजमाता ने 1957 में कांग्रेस के टिकट पर शिवपुरी-गुना लोकसभा सीट से चुनाव जीता और अपनी राजनीति की शुरुआत की। हालांकि यह सिलसिला लंबे समय तक नहीं चला और बाद में उन्होंने जनसंघ का दामन थाम लिया। 1980 में जनसंघ में उनकी राजनीति की नई शुरुआत हुई और बाद में इस पार्टी की उपाध्यक्ष तक बनाई गईं।
आज जब ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी में आने और उनके समर्थन से मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिरने की बात हो रही है, ऐसे में लोगों को विजयराजे सिंधिया का वह वाकया भी याद आ रहा होगा जब उन्होंने तत्कालीन कांग्रेस सरकार को गिराया था। 1967 में विजयराजे सिंधिया ने तत्कालीन मुख्यमंत्री डी पी मिश्रा की सरकार को गिराया था और जनसंघ के विधायकों के समर्थन से गोविंद नारायण सिंह को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया था।

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