तीन मुखों त्रिशक्ति माता बगलामुखी का मंदिर अत्यंत प्राचीन है। यह मंदिर आगर.मालवा जिले की तहसील नलखेड़ा में लक्ष्मणा नदी के किनारे स्थित है। द्वापर युगीन यह मंदिर बहुत ही चमत्कारिक माना जाता है। महाकाल की नगरी उज्जैन के बाद बगलामुखी माता का मंदिर भी तांत्रिक सिद्धियों के लिए प्रसिद्ध है। नवरात्रि में यहां भक्तों का ताता लगा रहता है। माना जाता है कि यहां माता के मंदिर में पूजा.अर्चना करने से हर मनोकामना पूर्ण होती है। साथ ही इस मंदिर से राजनेताओं का भी गहरा नाता रहता है।
मध्यप्रदेश में तीन मुखो वाली त्रिशक्ति माता बगलामुखी का एक मात्र मंदिर नलखेड़ा में स्थित है। इस मंदिर में माता बगलामुखी के अतिरिक्त माता लक्ष्मीए सरस्वतीए कृष्णए हनुमान तथा भैरव भी विराजमान हैं। इस मंदिर की स्थापना महाभारत में विजय पाने के लिए भगवान कृष्ण के निर्देश पर महाराजा युधिष्ठिर ने की थी। मान्यता यह भी है कि यहाँ की बगलामुखी प्रतिमा स्वयंभू है। यहाँ के ललीत नारायण पुजारी अपनी दादा परदादा के समय से पूजा.पाठ कर रहे है। महाभारत कालीन इस मंदिर का 1815 में इस मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया था।
इस मंदिर में लोग अपनी मनोकामना पूरी करने या किसी भी क्षेत्र में विजय प्राप्त करने के लिए यज्ञए हवन और पूजन.पाठ कराते हैं। बगलामुखी माता तंत्र की देवी हैंए इसलिए यहाँ पर तांत्रिक अनुष्ठानों का महत्व अधिक है। माता की मूर्ति स्वयंभू है और इस मंदिर की स्थापना स्वयं महाराज युधिष्ठिर ने की थी। जिसके बाद उन्होंने कौरवों पर विजय हासिल की थी। इस मंदिर में राजनेता अपनी जीत की कामना करने भी आते हे। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज भी यहां आ चुके है। समय.समय पर अन्य बडे़ राजनेता भी यहां माता के दर्शन करने और पूजा.पाठ करने आते है। यहां की कई हर मनोकमना पूर्ण होती है।
मंदिर के बाहर सोलह खम्भों वाला एक सभामंडप भी है। मंदिर के ठीक सम्मुख लगभग 80 फीट ऊँची एक दीप मालिका बनी हुई है। यह कहा जाता है की मंदिरों में दीप मालिकाओं का निर्माण राजा विक्रमादित्य द्वारा ही किया गया था। मंदिर के प्रांगन में ही एक दक्षिणमुखी हनुमान का मंदिर एक उत्तरमुखी गोपाल मंदिर तथा पूर्वर्मुखी भैरवजी का मंदिर भी स्थित हैए मंदिर का मुख्य द्वार सिंह्मुखी हैए जिसका निर्माण 18 वर्ष पूर्व कराया गया था।
बगलामुखी माता : द्वापर युगीन यह मंदिर बहुत ही चमत्कारिक

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