बैठक भारत और पाकिस्तान के अधिकारियों ने सीमा पर मंडरा रहे टिड्डी दल के खतरे से निपटने के लिए मुलाकात की। 1993 के बाद टिड्डी दल का यह सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है। ऐसी संभावनाएं भी हैं कि दोनों मुल्क संयुक्त तौर पर इस दिक्कत से निपटेंगे। भारत-पाक सीमा के मुनाबो गांव में करीब 4 घंटे चली इस बैठक में वैज्ञानिक भी शामिल हुए। इसमें खतरे से निपटने के तरीकों को लेकर चर्चा हुई। बुधवार को सीमा से लगे सभी जिलों को अलर्ट जारी किया गया।
भारतीय अधिकारी ने बताया कि पिछले महीने पाकिस्तान सीमा से जुड़े जैसलमेर के कुछ गांवों में टिड्डी दल की सक्रियता के निशान मिले थे। इसके बाद जोधपुर में टिड्डी चेतावनी संगठन के मुख्यालय ने इससे निपटने के लिए सर्वे करवाया था।
टिड्डी चेतावनी अधिकारी महेश चंद्र ने बताया कि 26 साल बाद टिड्डी दल का खतरा इतने बड़े स्तर पर मंडरा रहा है, हालांकि जैसलमेर में पहले भी यह दल देखे गए हैं। ये पाकिस्तान से आते हैं। भारत के बाड़मेर, जैसलमेर, फलौदी, बीकानेर और सूरतगढ़ इलाकों में फैल जाते हैं।
फिर एक बार बॉर्डर पर टिड्डी दल का खतरा, भारत-पाक अधिकारियों ने की

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