मैं राजकुमारी रहती तब तक
जब तक रहती मैं तुम्हारे द्वार…
पग तक न रखे होते जमी पर तब तक
जब तक रहती मैं तुम्हारे द्वार…
जीत जाती हूं मैं सब मुस्किलों से तब तक
जब तक देते आप मेरा साथ…
मां की डाट भी अनोखी लगती तब तक
जब तक देते आप मेरा साथ…
राहे बहुत सी थी मेरे पास तब तक
जब तक आप कहते मैं हूं ना तेरे पास…
अंधेरा भी लगता था रोहन तब तक
जब तक आप कहते मैं हूं ना तेरे पास…
सच्चा सबसे अच्छा दोस्त है मेरे पास तब तक
जब तक मैं हूं आपकी राजकुमारी आपके साथ…
अनोखी नहीं ये बात सब
सच है रह शब्द
यह है मेरा प्यार…
हीना तिवारी, संपादक

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