April 20, 2026

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न्यूज प्रवाह की ओर से कोविंद को जीत की हार्दिक बधाई

कोविंद लेगें 25 को शपथ, मिले उम्मीद से भी ज्यादा वोट, ऐसा रहा जीवन

राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार रामनाथ कोविंद जीत के बाद मीडिया के रूबरू हुए। कोविंद को यूपीए उम्मीदवार मीरा कुमार से करीब दोगुने वोट मिले हैं। कोविंद ही देश के अगले राष्ट्रपति होंगे। रामनाथ कोविंद को कुल वोट 10,98903 में से 702044 मिले हैं, जबकि मीरा कुमार को 367314 वोट मिले। राष्ट्रपति बनने के लिए कोविंद को 5,52,243 वोट चाहिए थे। निश्चित तौर पर रामनाथ कोविंद को क्रांस वोटिंग भी मिली है, जिसके बाद वह इतने वोटों से जीत हासिल कर सके। रामनाथ कोविंद 25 जुलाई को लेगें राष्ट्रपति पद की शपथ।
कोविंद ने जीत के बाद कहा कि सभी लोगों ने मुझपर जो विश्वास जताया है, उसके लिए सभी का आभारी हूं। मैं चुनाव में विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार को शुभकामनाओं के साथ धन्यवाद देता हूं। जिस पद का गौरव डॉण् राजेंद्र प्रसाद, सर्वपल्लि राधाकृष्णन, एपीजे अब्दुल कलाम जी और प्रणब मुखर्जी ने बढ़ाया है, उस पर पद पर रहना मेरे लिए गौरव की बात और जिम्मेदारी का एहसास करा रहा है। मेरे लिए ये भावुक क्षण है।
आज दिल्ली में सुबह से बारिश हो रही है, ये बारिश का मौसम मुझे मेरे बचपन की याद दिलाता है, जब मैं अपने पैतृक गांव में रहता था घर कच्चा था, मिट्टी की दीवारें थी, फूंस की छत थी तब काफी तेज बारिश होती थी, तो हम सब भाई बहन दीवार के किनारे खड़े होकर बारिश के रुकने का इंतजार करते थे। आज देश में ऐसे कितने ही रामनाथ कोविंद होंगे, जो भीग रहे होंगे कोई खेती कर रहा होगा, शाम को भोजन खाना है इसके लिए प्रबंध कर रहे होंगे। मैं उन सभी से कहना चाहता हूं कि परौख गांव का ये रामनाथ कोविंद उनका प्रतिनिधि बनकर जा रहा है।

ऐसा रहा है कोविंद का जीवन :
देश के 14वें राष्ट्रपति बनने जा रहे रामनाथ कोविंद दलित समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। 1991 से बीजेपी से जुड़े कोविंद पार्टी के दलित मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद भी संभाल चुके हैं। कुष्ठ रोगियों के लिए काम करने वाली संस्था दिव्य प्रेम सेवा मिशन के कोविंद संरक्षक हैं। इस पृष्ठभूमि में भाजपा नेताओं के अनुसार एक समय हालांकि ऐसा था, जब पार्टी कोविंद को बसपा प्रमुख मायावती के खिलाफ एक दलित चेहरे के तौर पर पेश करना चाहती थी। कानपुर देहात में डेरापुर तहसील के झींझक कस्बे के एक छोटे से गांव परौंख के रहने वाले रामनाथ कोविंद की प्रारंभिक शिक्षा संदलपुर ब्लॉक के गांव खानपुर से हुई। कानपुर के बीएनएसडी इंटर कॉलेज से उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई की। कानपुर यूनिवर्सिटी से बीकॉम और इसके बाद डीएवी लॉ कॉलेज से वकालत की पढ़ाई की। कोविंद ने दिल्ली हाईकोर्ट में वकालत की शुरुआत की। फिर दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में 16 साल तक प्रैक्टिस की।
कोविंद को 8 अगस्त, 2015 को बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया गया, तब नीतीश कुमार ने विरोध किया था। उनका कहना था यह नियुक्ति उनसे सलाह लिए बगैर की गई, हालांकि बाद में उनके बीच बेहतर आपसी तालमेल रहा। इसी का नतीजा था कि उनकी उम्मीदवारी की घोषणा के बाद नीतीश कुमार ने बेझिझक उनका समर्थन किया।
कोविंद उत्तर प्रदेश से पहली बार 1994 में राज्यसभा के लिए सांसद चुने गए। वह 12 साल तक राज्यसभा सांसद रहे। इस दौरान उन्होंने शिक्षा से जुड़े कई मुद्दों को उठाया। वह कई संसदीय समितियों के सदस्य भी रहे हैं। कोविंद की पहचान एक दलित चेहरे के रूप में रही है।

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