April 18, 2026

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नर्मदा परिक्रमा यात्रा के बाद दिग्विजय की राजनीति में नई पारी शुरू

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने बिना रुके 6 महीने 11 दिन में नर्मदा की परिक्रमा का आज समापन किया। सनातन धर्म का ऐसा नजारा जो सियासत में दिग्विजय सिंह की पिछली भूमिका के बिलकुल उलट था। दिग्विजय की छवि केंद्र की सियासत में आने के बाद प्रो-मुस्लिम की रही है। खास वक्त में उनके बयानों को भला कौन भूल सकता है। बाटला हाउस कांड और लादेन की मौत के वक्त दिग्विजय के बोल उनकी छवि खराब करते गए, फिर आतंकी हाफिज सईद को साहब कह बैठे और तो और यूपी चुनावों में मुस्लिमों को आरक्षण की वकालत भी करने वाले वो ही थे।
ऐसे में बदले सियासी समीकरण में राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी ने मानो नए सिरे से अपनी इनिंग प्लान की। नर्मदा की कठिन पद यात्रा पर निकल पड़े। यात्रा को धार्मिक करार दे 6 महीने कोई सियासी बयानबाजी नहीं करने का ऐलान भी कर दिया। शायद दिग्विजय को भी राहुल और कांग्रेस की तरह 2014 में बनी अपनी एंटी हिन्दू छवि का एहसास हो चला था।
इस यात्रा के दौरान संस्कारी हिंदू महिला की तरह उनकी पत्नी लगातार उनके साथ रहीं। रास्ते में मंदिरों के दर्शन करते, संत और मुनियों का आशीर्वाद लेते ये जोड़ी सनातन हिंदू परंपरा का आदर्शवादी तरीके से पालन करती रही।
इसके बाद जैसा दिग्विजय ने ऐलान किया था कि यात्रा पूरी करने के बाद वो कोई पकौड़े नहीं तलेंगे बल्कि, खुलकर राजनीति करेंगे। वो नजर भी आ गया। एक तरफ यात्रा का समापन हो रहा था तो दूसरी तरफ मंजर बता रहा था कि यहां से दिग्विजय की भविष्य की सियासत का आरम्भ भी हो रहा है।
दिग्विजय के इस धार्मिक मंच पर साधु-संतों के बीच मध्य प्रदेश कांग्रेस के तमाम दिग्गज आने लगे। कमलनाथ, प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव, पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद कांतिलाल भूरिया, राहुल की करीबी मीनाक्षी नटराजन, वरिष्ठ नेता सुरेश पचौरी, सांसद और कांग्रेस की लीगल सेल के मुखिया विवेक तनखा भी मंच पर बैठे।
मंच धार्मिक था इसलिए सियासी बातें तो नहीं हुईं, लेकिन हर वक्ता की जुबान पर दिग्विजय की तारीफ के पुल थे। दिग्गज कमलनाथ ने तो ये तक कह दिया कि दिग्विजय मेरे भाई हैं, मैं उनको सलाम करता हूं। वो हमारी आन बान शान हैं। वहीं राजनीति में किस्मत आजमाने का ख्वाब संजोये अभिनेता आशुतोष राणा ने दिग्विजय को राजर्षि बता डाला। राणा ने कहा कि दिग्विजय राजा तो हैं ही, लेकिन नर्मदा परिक्रमा करके वो ऋषि भी हो गए। इसलिए मैं उनको राजर्षि कहूंगा।

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