दिल्ली-एनसीआर को देश की पहली चालक रहित मेट्रो ट्रेन का तोहफा मिल गया है। क्रिसमस और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के जन्मदिन पर पीएम नरेंद्र मोदी मेट्रो की मजेंटा लाइन का तोहफा दिया। भारत अमेरिका के साथ अपने पड़ोसी देश चीन के बरक्स खड़ा हो गया है, जहां इस ड्राइवरलेस ट्रेन की शुरुआत हुई है।
यूरोप में डेनमार्क, स्पेन, इटली, फ्रांस, जर्मनी, हंगरी, स्विट्जरलैंड और ब्रिटेन में भी ड्राइवर लेस मेट्रो चलती है। इन देशों में एक से ज़्यादा शहरों में भी ऐसी मेट्रो चलाई जाती है। इनके अलावा अमेरिका और कनाडा में भी ड्राइवरलेस ट्रेन चलती है। वहीं, चीन, ब्राजील और पेरू में भी इस तरह की मेट्रो काफ़ी पहले आ चुकी है।
दिल्ली में तीसरे फेज की मेट्रो लाइनों पर चालक रहित ट्रेन चलाई जाएगी। इनमें मुकंदपुर से शिव विहार वाली पिंक लाइन और जनकपुरी से बोटानिकल गार्डन वाली मेजेंटा लाइन है। चालक रहित मेट्रो ट्रेन की खूबियों की बात करें तो यह एक एडवांस टेक्नोलाजी है और दुनियाभर में तेजी से इस्तेमाल की जा रही है। ड्राइवरलेस ट्रेन से मतलब कम्यूनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल सिस्टम से है, जिसमें ट्रैक पर चलने वाली सभी ट्रेनें आपस में और कंट्रोल रूम से डिजिटल रेडियो कम्यूनिकेशन के जरिए एक दूसरे से जुड़ी होती हैं। चालक रहित सभी ट्रेनें 6 कोच वाली हैं और सीबीटीसी यानी ड्राइवरलेस ऑपरेशन तकनीकी से लैस हैं। इस तरह की ट्रेनों में ड्राइवर केबिन नहीं होगा, इसलिए करीब 40 ज्यादा मुसाफिर सफर कर पाएंगे।
दिल्ली में चली चालक रहित मेट्रो, अब कुछ देशों में भारत का नाम भी

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