April 20, 2026

News Prawah

UDYAM-MP-49-0001253

चैत्र नवरात्रि आज से, यह है शुभ मुहूर्त, इन मंत्रों से करे स्थापना

चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 5 अप्रैल, 2019 को ही दोपहर बाद 02 बजकर 21 मिनट पर रेवती नक्षत्र, इन्द्र योग और नाग करण में शुरू हो गई है। सूर्योदय कालीन प्रतिपदा तिथि 6 अप्रैल, शनिवार के दिन रेवती नक्षत्र और वैधृति योग में होगी।
रेवती नक्षत्र जो कि पंचक नक्षत्रों में से एक है, सुबह 07 बजकर 22 मिनट तक रहेगा, लेकिन वैधृति योग रात 09 बजकर 47 मिनट तक चलेगा। वैधृति योग में घट स्थापना वर्जित है। चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा कल शनिवार 6 अप्रैल, 2019 को पूरे दिन मान्य रहेगी और वैधृति योग रात्रि 09 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। पूरे दिन घट स्थापना का मुहर्त नहीं है, लेकिन नित्य ही सूर्य जब अपने चरम पर होता है, तो सभी कुछ अस्त हो जाता है और सूर्य के आगे सभी कुछ प्रभावहीन हो जाता है। मध्याह्न के इस मुहूर्त को अभिजित मुहूर्त कहते हैं।
6 अप्रैल को यह अभिजित मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 40 मिनट से 12 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। इस बार नवरात्र की कलश स्थापना अभिजित मुहूर्त में करना श्रेयष्कर है। लिहाजा, अभिजित मुहूर्त में, यानी दोपहर 11ः40 से 12ः25 के बीच अपने घट या कलश की स्थापना करें।
घट स्थापना ईशान कोण, यानी उत्तर-पूर्व दिशा में करे। का चुनाव करना चाहिए। उत्तर-पूर्वी हिस्से की अच्छे से साफ.सफाई करें। कलश को गले तक साफ, शुद्ध जल से भरना चाहिए और उस कलश में एक सिक्का डालना चाहिए। अगर संभव हो तो कलश के जल में पवित्र नदियों का जल जरूर मिलाना चाहिए। इसके बाद कलश के मुख पर अपना दाहिना हाथ रखकर –
गंगे! च यमुने! चैव गोदावरी! सरस्वति!
नर्मदे! सिंधु! कावेरि! जलेस्मिन् सन्निधिं कुरु।।
इस प्रकार ये मंत्र पढ़ना चाहिए। अगर आपको ये मंत्र याद ना हो, तो बिना मंत्र के ही गंगा, यमुना, कावेरी, गोदावरी, नर्मदा, शिप्रा आदि पवित्र नदियों का ध्यान करते हुए उन नदियों के जल का आह्वाहन उस कलश में करना चाहिए और ऐसा भाव करना चाहिए कि सभी नदियों का जल उस कलश में आ जाये। साथ ही वरूण देवता का भी आह्वाहन करना चाहिए कि वो उस कलश में अपना स्थान ग्रहण करें। इसके बाद कलश के मुख पर कलावा बांधना चाहिए और एक ढक्कन या परई या दियाली या मिट्टी की कटोरी, जो भी आप समझते हों और जो भी आपके पास उपलब्ध हो, उससे कलश को ढक देना चाहिए।
अब ऊपर ढकी गयी कटोरी में जौ भरिये और अगर जौ न हो तो आप चावल भी भर सकते हैं। इसके बाद एक जटा वाला नारियल लेकर उसे लाल कपड़े से लपेटकर, कलावे से बांध देना चाहिए। फिर नारियल को जौ या चावल से भरी हुई कटोरी के ऊपर स्थापित करना चाहिए।

Share to...