चमोली जिले में बदरीनाथ धाम से 3 किमी दूर चीन सीमा पर स्थित देश के अंतिम गांव माणा को हेरिटेज विलेज बनाने की कवायद शुरू हो गई है। जोशीमठ के उपजिलाधिकारी अनिल कुमार चन्याल बताते हैं कि इसके लिए सीमांत क्षेत्र विकास निधि और स्पेशल कंपोनेंट प्लान के तहत 4 करोड़ की धनराशि स्वीकृत हुई है। इस धनराशि से माणा गांव में ऑडिटोरियम, म्यूजियम, एंपीथियेटर और पार्किंग का निर्माण होना है। साथ ही भीमपुल, व्यास गुफा, गणेश गुफा और आसपास के क्षेत्रों का सुंदरीकरण भी प्रस्तावित है। हांलाकि, इसके लिए पहले स्थानीय लोगों से बाच की जाएगी।
समुद्र तल से 3118 मीटर की ऊंचाई पर स्थित माणा गांव वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध से पूर्व तिब्बत से व्यापार का प्रमुख केंद्र हुआ करता था। युद्ध के बाद यहां से तिब्बत की आवाजाही पर रोक लगा दी गई, लेकिन माणा का महत्व फिर भी बना रहा। आज भी हर साल लाखों की संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक और श्रद्धालु माणा की ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और पौराणिक विरासत को देखने के लिए माणा गांव पहुंचते हैं। बदरीनाथ धाम की परंपराओं से माणा गांव सीधा जुड़ा हुआ है। यहां के लोग बदरीनाथ धाम के हक-हकूकधारी हैं। मंदिर के कपाट बंद होने पर भगवान बदरी नारायण को पहनाया जाने वाला घृत कंबल भी माणा गांव की महिलाएं ही तैयार करती हैं।
माणा में भोटिया जनजाति के लोग रहते हैं, जो तीर्थाटन एवं पर्यटन से अपनी आजीविका चलाते हैं। पर्यटक व श्रद्धालु यहां से हाथों से बने ऊनी वस्त्र, गलीचे, कालीन, दन, शॉल, पंखी सहित अन्य पारंपरिक वस्तुएं खरीदकर ले जाते हैं। माणा गांव निवासी पीतांबर मोल्फा कहते हैं कि माणा के हेरिटेज विलेज बनने से गांव में न केवल पर्यटन सुविधाओं का विकास होगा, स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के साधन भी विकसित होंगे। जिला पर्यटन अधिकारी विजेंद्र पांडेय बताते हैं कि माणा गांव को होम स्टे के तहत लाभान्वित करने की योजना है।
चीन सीमा पर स्थित देश का अंतिम गांव बनेगा हेरिटेज विलेज

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