ऑस्ट्रेलिया में 21वें कॉमनवेल्थ खेलों के आखिरी 10वें दिन भारत ने 66 पदकों के साथ बहुत ही शानदार अंदाज में अपने शानदार अभियान का समापन किया। यह कुल मिलाकर भारत का खेलों के इतिहास में तीसरा सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। करोड़ों हिंदुस्तानी खेलप्रेमियों की नजरें आखिरी दिन इस बात पर लगी थीं कि क्या भारत साल 2014 में ग्लास्गो के प्रदर्शन को पीछे छोड़ पाएगा या नहीं।
और भारतीय दल ने रविवार सुबह इन उम्मीदों पर पूरी तरह खरा उतरते हुए ग्लास्गो के 64 पदकों को पीछे छोड़ते हुए इतिहास रच दिया। शुरुआत बैडमिंटन में सायना नेहवाल के पदक के साथ हुई, तो समापन बैडमिंटन में पुरुष डबल्स में रजत के साथ हुआ।
कुल मिलाकर भारत ने प्रतियोगिता में 66 पदक जीते इनमें 26 स्वर्ण, 20 रजत और 20 कांस्य पदक शामिल हैं। यह भारत का कुल मिलाकर खेलों के इतिहास में तीसरा सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। इससे पहले भारत ने साल 2010 में दिल्ली में हुए खेलों में 101 और साल 2002 में मैनचेस्टर में 69 पदक जीते थे। गोल्ड कोस्ट में भारत का आखिरी पदक बैडमिंटन में पुरुष डबल्स मुकाबलों के फाइनल में हुई हार के साथ रजत पदक के रूप में आया।
कुल 66 पदकों के साथ भारत रहा तीसरे स्थान पर, रचा इतिहास

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