April 21, 2026

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एनआईए ने जप्त की खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत पन्नू की संपत्तियां

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने आज एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। एनआईए ने खालिस्तानी आतंकी और प्रतिबंधित सिख फॉर जस्टिस के नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू की पंजाब के अमृतसर और चंडीगढ़ स्थिति संपत्तियों को जप्त कर लिया है। पन्नू इस समय अमेरिका में रह रहा है और वहां से लगातार वीडियो जारी भारत के खिलाफ जहर उगलता रहता हैं।

एनआईए ने पन्नू की जो संपत्तियां पंजाब में जप्त की हैं उनमें अमृतसर जिले के बाहरी इलाके में स्थित पैतृक गांव खानकोट में 46 कनाल कृषि संपत्ति और चंडीगढ़ के सेक्टर 15, सी स्थित उसका मकान शामिल हैं। जप्ती का यह है कि अब पन्नू संपत्ति का अधिकार खत्म हो गया है और यह संपत्ति अब सरकार की है।

2020 में भी उसकी संपत्तियां कुर्क कर ली गई थी। जिसका मूल अर्थ यह था कि वह संपत्ति नहीं बेच सकता था, लेकिन इस कदम के बाद पन्नू ने संपत्ति का मालिकाना हक खो दिया है। पन्नू की ये तमाम संपत्तियां एनआइए मोहाली कोर्ट के आदेश पर जप्त की गई हैं।

एनआईए ने बकायदा कोठी के बाहर बोर्ड लगाकर क्लियर कर दिया है कि इस संपत्ति पर अब पन्नू का कोई अधिकार नहीं है और ये अब एक सरकारी संपत्ति बन गई है। मोहाली में 2020 में दर्ज एक मामले में पन्नू भगोड़ा घोषित है। इस कोठी के एक चौथाई हिस्से को एनआइए कोर्ट के आदेश पर पहले Attach कर लिया गया था। इसके साथ ही अमृतसर के गाँव ख़ानकोट में भी पन्नू की 46 कनाल खेती योग्य जमीन जप्त की गई है।

दरअसल कनाडा में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की मौत को लेकर भारत-कनाडा के बीच तल्खी बढ़ रही है। कनाडा में रहने वाले हिंदुओं को खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने धमकी देकर कहा है कि वे देश छोड़ दें। इस पूरे मामले को लेकर कनाडाई हिंदुओं ने ट्रूडो सरकार से एक चिट्ठी में मांग करते हुए कहा है कि खालिस्तानी आतंकी पन्नू की स्पीच हेट क्राइम के तौर पर दर्ज की जाए।

  • मूल रूप से पंजाब के खानकोट से ताल्लुक रखने वाला गुरपतवंत सिंह पन्नू इस समय अमेरिका का नागरिक है। पंजाब यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई करने के बाद पन्नू विदेश चला गया था। तभी से वह कनाडा और अमेरिका में रह रहा है। वह विदेश में रहकर ही खालिस्तानी गतिविधियों को अंजाम देते रहता है और समय-समय पर वीडियो जारी कर भारत सरकार के खिलाफ जहर उगलता है। पाकिस्तानी खुफिया. एजेंसी आईएसआई की मदद से उसने सिख फॉर जस्टिस संगठन (SFJ) नाम के एक संगठन का गठन भी किया है जिस पर भारत ने 2019 में बैन लगा दिया था।
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