April 19, 2026

News Prawah

UDYAM-MP-49-0001253

इस दिवाली मन रहा है ग्रीन पटाखे का शोर, क्या है यह जाने

दिवाली को भारत का सबसे बड़ा त्योहार कहा जाता है। हर तरफ रोशनी ही रोशनी। लोग मिठाईयां बांटते हैं। इसके साथ ही पटाखे भी फोडे जाते है। इनके बगैर भी दिवाली अधूरी लगती है। हालांकि, काफी लोग अब पटाखों के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन दिवाली पर पटाखे फोड़ना भी एक परंपरा के तौर पर लिया गया है। इस दिवाली भी लोग बहुत पटाखे फोड़ने का मन बना लिए हैं, लेकिन सारी बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा अक्टूबर 2018 में पटाखों पर दिशा-निर्देश लागू कर दिए गए, जिसमें इनपर प्रतिबंध लगा दिया गया।
इसके बाद पटाखा निर्माता भी अपने व्यवसाय को लेकर भयभीत हो गए। हालांकि, ग्रीन क्रैकर्स की घोषणा के बाद उद्योग को बचा लिया गया, ऐसा कहा जा रहा है। यहां बात यह है कि पहले जिन पटाखों को छोड़ा करते थे, वह तो अब मार्केट में मौजूद नहीं हैं और अगर है भी तो गैर-कानूनी तरीके से, तो अब बात यह है कि जिन ग्रीन पटाखों को अनुमति दी गई है, उसमें पिछले पटाखों से क्या चेंज हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार ग्रीन पटाखे को पर्यावरण के अनुकूल माना जाता है क्योंकि वे पारंपरिक पटाखे की तुलना में 30 फीसदी कम प्रदूषकों का उत्सर्जन करते हैं। ये पटाखे वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान-राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान द्वारा वायु प्रदूषण को कम करने और देश में स्वास्थ्य खतरों को कम करने के लिए विकसित किए गए हैं।
सीएसआईआर-एनईईआरआई द्वारा किए गए शोध से पता चला कि बेरियम नाइट्रेट एक महत्वपूर्ण तत्व है, जो हानिकारक रसायनों के उत्सर्जन में सहायक होता है और इसलिए इसके विकल्प देखे जा रहे हैं। इसके अलावा आपको बता दें कि ग्रीन पटाखों में रासायनिक फॉर्मूलेशन है, जो पानी में मॉलिक्यूल्स का उत्पादन करता है, जो उत्सर्जन के स्तर को कम करता है और धूल को सोख लेते है।
सुप्रीम कोर्ट ने दीपावली पर रात 8 से 10 बजे के बीच पटाखे चलाने का समय निर्धारित किया है। त्योहार पर ग्रीन पटाखे चलाने का आदेश है, लेकिन इनकी कीमत अन्य पटाखों से 3 गुना ज्यादा है।

Share to...