श्योपुर: एक तरफ जहाँ पूरा देश रोशनी के पावन त्योहार दीपावली का जश्न मना रहा है, वहीं श्योपुर जिले का एक ऐसा आदिवासी गांव भी है जो आज भी घोर अंधेरे और मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जीने के लिए अभिशप्त है। श्योपुर जिले के कराहल विकासखंड के अंतर्गत आने वाला कुरचोर खुर्द गांव, जहाँ आजादी के इतने लंबे साल बीत जाने के बाद भी आज तक बिजली नहीं पहुँच सकी है। दीपावली जैसे बड़े और महत्वपूर्ण पर्व पर इन ग्रामीणों का दर्द एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है, जहाँ लोग दीयों की रोशनी के बजाय अंधेरे में जीवन गुजारने को विवश हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने आज तक अपने गांव में बिजली के दर्शन ही नहीं किए हैं। इसके अलावा गांव में पेयजल की भी कोई सुविधा नहीं है, और पानी के लिए महिलाओं को कठिन पहाड़ी रास्ते से घाटी उतरकर ढाई किलोमीटर नीचे जाना पड़ता है, जिसके बाद सिर पर बर्तन रखकर वे वापस घाटी चढ़कर घर पानी लाती हैं।
🗳️ सिर्फ चुनाव के समय आते हैं नेता और अधिकारी; वादे करने के बाद कोई पलटकर नहीं देखता
राजनेताओं और अधिकारियों की बेरुखी:
- खोखले वादे: श्योपुर जिले के बिल्कुल अंतिम छोर पर बसे कुरचोर खुर्द गांव में बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुँचाने के लिए जनप्रतिनिधियों ने चुनाव के वक्त बड़े-बड़े वादे तो खूब किए, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद किसी ने भी दोबारा पलटकर सुध नहीं ली।
- अनसुनी फरियाद: ग्रामीणों ने कई बार जिला मुख्यालय तक पहुँचकर प्रशासनिक अधिकारियों से बिजली और पानी की सुविधा उपलब्ध कराने की गुहार लगाई, लेकिन हर बार उन्हें कोरे आश्वासन ही मिले और कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई।
📜 आवेदन देकर थक चुके हैं ग्रामीण; आगोनी लाल और श्रेसी बाई ने बयां किया अपना दर्द
ग्रामीणों की जुबानी उनकी समस्याएं:
- आगोनी लाल आदिवासी का दर्द: ग्रामीण आगोनी लाल आदिवासी ने बताया कि “गांव में हालात बेहद खराब और दयनीय हैं। लोग जैसे-तैसे अपना जीवन काट रहे हैं। पीने के पानी का कोई साधन नहीं है और ग्रामीणों को रोज घाटी उतरकर पानी लाना पड़ता है। बिजली की भी कोई व्यवस्था नहीं है। प्रशासन को कई बार लिखित में समस्या से अवगत कराया, लेकिन आज तक कोई समाधान नहीं निकला।”
- श्रेसी बाई की पीड़ा: वहीं श्रेसी बाई ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि उनके गांव में न तो बिजली है और न ही पानी की कोई व्यवस्था। उन्होंने कई बार अधिकारियों को आवेदन दिए, अपनी समस्या बताई, लेकिन हर तरफ से निराशा ही हाथ लगी।
🧒 बच्चों की पढ़ाई हो रही है प्रभावित; कलेक्टर के दौरे के बाद भी नहीं बदला गांव का भाग्य
बुनियादी समस्याओं के गंभीर परिणाम:
- अंधेरे में भविष्य: ग्रामीण बीरबल आदिवासी ने बताया कि पानी की समस्या इस गांव में आजादी के बाद से ही जस की तस बनी हुई है। ग्रामीण बेहद विषम और मुश्किल परिस्थितियों में अपना समय गुजार रहे हैं। बिजली न होने के कारण छोटे-छोटे बच्चों की पढ़ाई पर सबसे बुरा असर पड़ रहा है। रात होते ही पूरे गांव में घना अंधेरा छा जाता है और जहरीले मच्छरों का भारी प्रकोप रहता है। पूर्व में जिला कलेक्टर भी गांव का दौरा कर चुके हैं और उन्हें तमाम समस्याओं से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ है।
- युवाओं की मजबूरी: गांव के युवा राजाराम ने बताया कि पानी के लिए ग्रामीणों को हर दिन भारी मशक्कत करनी पड़ती है। घाटी उतरकर पानी लाना और फिर उसे सिर पर ढोकर वापस गांव पहुँचना उनकी रोजमर्रा की मजबूरी बन चुका है।
🏛️ प्रशासन का रटारटाया जवाब; कराहल एसडीएम बोले—’जांच रिपोर्ट के बाद होगी उचित कार्रवाई’
प्रशासनिक प्रतिक्रिया:
- अधिकारियों का पक्ष: इस पूरे गंभीर मामले पर जब कराहल के एसडीएम विजय शाक्य से बात की गई तो उनका कहना था कि इस संबंध में सीईओ से विस्तृत जांच रिपोर्ट ले ली गई है।
- संभावित कदम: उन्होंने आश्वासन दिया कि ग्रामीणों की कठिनाइयों को दूर करने और उनकी मदद के लिए जो भी संभव प्रशासनिक कदम होगा, वह जल्द से जल्द उठाया जाएगा।

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