मध्य प्रदेश के विदिशा जिले से एक राहत भरी खबर सामने आई है। लटेरी विकासखंड के बिलाखेड़ी खुर्द गाँव में बच्चों के जान जोखिम में डालकर नाला पार करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह हरकत में आ गया है। बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से वैकल्पिक शिक्षण व्यवस्था लागू कर दी है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के निर्देश पर प्रभावित 15 विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए गाँव के ही एक बड़े मकान में अस्थाई स्कूल शुरू कर दिया गया है, जहाँ अतिरिक्त शिक्षकों की तैनाती कर दी गई है ताकि बारिश के मौसम में बच्चों को स्कूल जाने के लिए नाला न पार करना पड़े।
👩🏫 घर पर ही की गई पढ़ाई की व्यवस्था, जब तक नाले में पानी तब तक जारी रहेगा केंद्र
जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र कुमार अहिरवार ने जानकारी देते हुए बताया कि नाले के दूसरी तरफ स्थित बसाहट में एक बड़े मकान को अस्थाई पाठशाला के रूप में तैयार किया गया है। इस मकान में रहने वाले परिवार के 7 से 8 बच्चे हैं, जबकि बाकी बच्चे आसपास के अन्य परिवारों से हैं। इन सभी 15 विद्यार्थियों की पढ़ाई सुचारू रूप से चलाने के लिए इसी मकान के भीतर वैकल्पिक कक्षाएं शुरू करा दी गई हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह अस्थाई व्यवस्था तब तक सुचारू रहेगी जब तक नाले का उफान और जलभराव पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता। पानी पूरी तरह सूखने के बाद ही बच्चे अपने मूल स्कूल भवन में वापस जा सकेंगे।
🚧 मुख्य मार्ग की लंबी दूरी और सुरक्षा को लेकर प्रशासन सतर्क
स्थानीय अधिकारियों द्वारा मौके पर मुआयना करने के बाद यह बात सामने आई कि गाँव के बीच से गुजरने वाले नाले में फिलहाल घुटनों तक तेज पानी बह रहा है। इस बसाहट में कुल 46 बच्चे पढ़ते हैं, जिनमें से 31 बच्चे स्कूल की तरफ रहते हैं और 15 बच्चे नाले के उस पार हैं। बच्चों के नाला पार करने की मुख्य वजह यह थी कि पक्का मार्ग होने के बावजूद मुख्य रास्ता करीब 2 किलोमीटर लंबा पड़ता है, और छोटे बच्चों के पास कोई वाहन या साइकिल न होने के कारण वे समय बचाने के लिए इस नाले को पैदल पार करते थे।
शिक्षा विभाग ने इस मामले पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वायरल वीडियो के माध्यम से सही समय पर सूचना मिलने से बच्चों की सुरक्षा समय रहते सुनिश्चित की जा सकी है। साथ ही, जिले के सभी बीआरसीसी (BRCC) को निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के संवेदनशील इलाकों की समीक्षा करें, ताकि बारिश के कारण रास्ते बाधित होने पर स्थानीय स्तर पर तुरंत पढ़ाई की वैकल्पिक व्यवस्था की जा सके।

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