November 6, 2026

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Temple Controversy News Updates: क्या है उज्जैन के महाकाल मंदिर में रवींद्र पुरी महाराज के साथ हुई अभद्रता का पूरा मामला? पढ़िए रिपोर्ट

मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन व्यवस्था और मंदिर कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज गुरुवार को बाबा महाकाल के दर्शन करने मंदिर पहुँचे थे। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर के कुछ कर्मचारियों ने उनके और उनके साथ आए अन्य साधु-संतों के साथ अभद्र व्यवहार किया है। निर्धारित प्रोटोकॉल होने के बावजूद उन्हें प्रवेश के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा, और मोबाइल चेकिंग को लेकर मंदिर के कर्मचारियों व उनके समर्थकों के बीच तीखी बहस हुई।

🛕 प्रोटोकॉल तय होने के बावजूद झेलनी पड़ी परेशानी; चांदी गेट से गर्भगृह तक हुआ गतिरोध

घटना का विवरण और पृष्ठभूमि:

  • कुंभ के बाद उज्जैन आगमन: नासिक कुंभ मेले में ध्वज फहराने के बाद अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज अपने समर्थकों और अनुयायियों के साथ उज्जैन पहुँचे थे और बाबा महाकाल के दर्शन करने मंदिर गए थे।
  • तय प्रोटोकॉल: मंदिर के नियमों और तय प्रोटोकॉल के अनुसार उन्हें चांदी गेट से गर्भगृह में प्रवेश कर पूजन-अर्चन करना था। लेकिन रवींद्र पुरी का आरोप है कि प्रवेश के दौरान सुरक्षा और चेकिंग में तैनात कर्मियों ने उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान किया, अंदर जाने से रोका और काफी देर तक मशक्कत करनी पड़ी, तब जाकर उन्हें गर्भगृह में दर्शन का अवसर मिला।
🗣️ “साधु-संतों के साथ हमेशा होता है अभद्र व्यवहार; इन्हें मिली हुई है खुली छूट”

महाराज का तीखा बयान और आक्रोश:

  • बदतमीजी का आरोप: रवींद्र पुरी महाराज ने बेहद आक्रोशित होते हुए कहा कि केवल उनके अनुयायियों और समर्थकों के साथ ही नहीं, बल्कि उनके साथ भी सरेआम बदतमीजी की गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि वे इस पूरे मामले की शिकायत भोपाल से लेकर सीधे दिल्ली तक उच्च स्तर पर दर्ज कराएंगे।
  • कर्मचारियों पर निशाना: उन्होंने कहा कि मंदिर के कुछ चुनिंदा कर्मचारियों को हमेशा से साधु-संतों से परेशानी रहती है और वे संतों के साथ जानबूझकर अभद्र व्यवहार करते हैं। यह कोई आज की पहली घटना नहीं है, उन्होंने इसे कई बार देखा है। ऐसा प्रतीत होता है कि ऐसे लापरवाह और अमर्यादित कर्मचारियों को खुली छूट मिली हुई है, और जब भी कोई संत मंदिर पहुँचता है, वे किसी न किसी बात पर विवाद खड़ा कर देते हैं।
🌐 “कुछ लोग मंदिर की छवि कर रहे धूमिल; सिंहस्थ 2028 को लेकर जताई चिंता”

भविष्य की व्यवस्थाओं पर सवाल:

  • दंडात्मक कार्रवाई की मांग: रवींद्र पुरी ने बताया कि उन्होंने संबंधित दोषी कर्मचारियों के नाम मंदिर प्रशासन को स्पष्ट रूप से बता दिए हैं, और ऐसे व्यक्तियों को मंदिर जैसी पवित्र संस्था में रखना बिल्कुल भी उचित नहीं है।
  • सिंहस्थ 2028 की चिंता: उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि महाकाल बाबा केवल उज्जैन के ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के आराध्य हैं। आगामी वर्ष सिंहस्थ 2028 में यहाँ करोड़ों श्रद्धालु और संत आएंगे, लेकिन इस तरह के कर्मचारियों के गैर-जिम्मेदाराना रवैये से महाकाल मंदिर की विश्वव्यापी छवि धूमिल हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने मंदिर की दर्शन व्यवस्था को पूरी तरह से एक ‘धंधा’ बना लिया है, जिस पर तुरंत रोक लगनी चाहिए।
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