September 27, 2026

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Sidhi News: मध्य प्रदेश के सीधी में धान की फसल पर कीड़ों का भयंकर प्रकोप, हजारों एकड़ में फैली बीमारी से किसान चिंतित

सीधी: मध्य प्रदेश के सीधी जिले में इन दिनों धान की लहलहाती फसल पर कीड़ों और विभिन्न अज्ञात रोगों का भारी प्रकोप देखने को मिल रहा है, जो क्षेत्र के सभी अन्नदाता किसानों के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम कुसमी, रौहाल, कोडार, भगवार सहित जिले के कई अन्य गांवों में इस साल धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। स्थानीय किसानों का कहना है कि खेतों में अजीबोगरीब कीड़े धान के हरे पत्तों को तेजी से काटकर उनमें जाले बना रहे हैं। इस गंभीर रोग के कारण पत्ते धीरे-धीरे पूरी तरह सफेद पड़कर सूखने लगे हैं। कई खेतों में फसल की ऐसी दयनीय हालत देखकर किसानों को इस बार बंपर पैदावार की बजाय उत्पादन में भारी गिरावट आने की आशंका सता रही है।

💸 किसानों की मेहनत और लागत पर पानी, मदद की गुहार

प्रभावित किसानों का दर्द सामने आया है कि उन्होंने इस बार धान की फसल को तैयार करने में अपनी तरफ से दिन-रात कड़ी मेहनत और काफी पूंजी (लागत) लगाई है। लेकिन इन खतरनाक कीड़ों के अचानक फैले प्रकोप से उनकी पूरी फसल आंखों के सामने खराब होने लगी है। यदि समय रहते इस गंभीर समस्या का उचित उपचार नहीं किया गया, तो जिले के सैकड़ों गांवों की हजारों एकड़ उपजाऊ जमीन पर खड़ी धान की फसल को बहुत बड़ा नुकसान पहुंच सकता है। इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित होने वाले किसानों में आनंद सिंह, नारायण सिंह, अहिबरन सिंह, राघवेंद्र सिंह, दल प्रताप सिंह और अमरपाल सिंह सहित कई अन्य स्थानीय किसान प्रमुख रूप से शामिल हैं।

🗣️ समाजसेवी और कांग्रेस अध्यक्ष ने की प्रशासनिक सर्वे व दवा वितरण की मांग

फसल पर आए इस बड़े संकट को देखने के बाद समाजसेवी आनंद सिंह ‘ददुआ’ ने चिंता जताते हुए बताया कि, ”कुसमी क्षेत्र के अंदर बड़ी संख्या में किसान इस समय भारी परेशानी से जूझ रहे हैं। उन्होंने जिला प्रशासन और कृषि विभाग से मांग की है कि तुरंत प्रभावित गांवों में विशेषज्ञ टीमों को भेजकर खेतों का मैदानी निरीक्षण कराया जाए और किसानों को आवश्यक दवाइयां मुफ्त उपलब्ध कराई जाएं।” वहीं दूसरी ओर, कुसमी ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विमल जायसवाल ने भी कड़े शब्दों में प्रशासन से मांग की है कि तुरंत फसल का विशेष सर्वे कराकर किसानों को राहत पहुंचाई जाए।

🧪 कृषि विस्तार अधिकारी ने दी ‘प्रोफेनोफॉस’ के छिड़काव और कीट नियंत्रण की सलाह

सीधी जिले के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एस.पी. साकेत ने इस विषय पर जानकारी देते हुए बताया कि, ”धान की हरी पत्तियों को काटकर जाले बनाने वाले इन कीटों के प्रभावी नियंत्रण के लिए खेतों का नियमित निरीक्षण करना बेहद आवश्यक है। शुरुआती अवस्था में ही प्रभावित पत्तियों और हानिकारक कीटों की सटीक पहचान कर उचित कीटनाशक का सही समय पर छिड़काव किया जाना चाहिए।” उन्होंने इसके बचाव के लिए ‘प्रोफेनोफॉस’ नामक दवा को 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में अच्छी तरह घोलकर निर्धारित मात्रा में खेतों में छिड़काव करने की वैज्ञानिक सलाह दी है। इसके साथ ही उन्होंने खेतों में जैविक खाद और अनुशंसित जैविक कीटनाशकों का अधिक से अधिक उपयोग करने की बात भी कही है।

🔍 खेतों की नियमित निगरानी और ब्लास्ट रोग से बचाव के उपाय

कृषि अधिकारी ने आगे यह भी बताया कि, ”यदि किसी किसान की फसल में ‘ब्लास्ट रोग’ के लक्षण दिखाई देते हैं, तो कृषि विशेषज्ञों की उचित सलाह के अनुसार ही ‘कॉपर ऑक्सीक्लोराइड’ का निर्धारित मात्रा में छिड़काव किया जा सकता है। इस प्रकार की दवा का प्रयोग हमेशा फसल की वर्तमान स्थिति और रोग की पहचान के बाद ही किया जाना चाहिए।” उन्होंने किसानों को विशेष रूप से सलाह दी है कि वे प्रभावित खेतों में भूलकर भी अनावश्यक रूप से ज्यादा नत्रजनयुक्त (नाइट्रोजन) खाद का प्रयोग न करें और लगातार अपने खेतों की निगरानी करते रहें।

💰 सरकारी सहायता का अभाव, बाजार से महंगे दाम पर दवा खरीदने को मजबूर किसान

हालांकि, जमीनी हकीकत यह भी सामने आई है कि कृषि विभाग के सरकारी स्तर पर फिलहाल इस तरह की आवश्यक दवाइयां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं। ऐसी स्थिति में मजबूर होकर किसानों को खुले बाजार से अपनी जेब से पैसे खर्च कर महंगे दामों में दवाइयां खरीदकर अपनी फसल का उपचार करना पड़ रहा है। पीड़ित किसानों ने पुरजोर मांग की है कि विभाग तत्काल प्रभाव से सभी प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे करे और जरूरतमंद किसानों को आवश्यक कीटनाशक दवाइयां मुफ्त मुहैया कराए, ताकि बहुमूल्य धान की फसल को समय रहते बड़े नुकसान से बचाया जा सके।

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