मध्य प्रदेश के धार जिले के तिरला क्षेत्र स्थित मान नदी पर बहुप्रतीक्षित ‘सतीपुरा-गढ़ पुल’ का निर्माण होने से क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों के जीवन में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव आया है। जहां कुछ समय पहले तक उफनती हुई मान नदी को पार करना स्थानीय लोगों के लिए एक मजबूरी और रोजाना का जानलेवा जोखिम हुआ करता था, वहीं अब इस नए और मजबूत पुल के बन जाने से क्षेत्र के चहुंमुखी विकास और सुगम आवागमन की एक बिल्कुल नई राह खुल गई है।
🛶 जानलेवा सफर और 45 किलोमीटर के चक्कर से राहत: डोंगी और नाव के सहारे से मिली निजात
पुल के निर्माण से पहले सतीपुरा और आसपास के दर्जनों गांवों के ग्रामीणों को नदी पार करने के लिए केवल डोंगी और छोटी नावों का ही एकमात्र सहारा लेना पड़ता था। बरसात के मौसम में मान नदी का बहाव इतना तेज हो जाता था कि नाव से सफर करना बेहद खतरनाक साबित होता था, और पूर्व में कई बार वाहन व सामान बहने की गंभीर दुर्घटनाएं भी सामने आ चुकी थीं। स्थानीय निवासी गोलू मेड ने बताया कि पहले नदी में पानी अधिक होने पर नाव बंद हो जाती थी और करीब 45 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाकर जाना पड़ता था, यहाँ तक कि आवागमन की दुर्दशा के कारण लोग रिश्ते तक करने से कतराते थे।
🚀 शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार को मिली नई रफ्तार: MPRRDA के प्रयासों से मुख्य मार्ग से जुड़े 35 गांव
मध्य प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण (MPRRDA) द्वारा निर्मित इस पुल से सतीपुरा सहित आसपास के लगभग 30 से 35 गांवों को सीधा लाभ मिला है। MPRRDA के महाप्रबंधक सूर्यप्रताप सिंह के अनुसार, इस पुल के बनने से ग्रामीणों का सीधा संपर्क मुख्य मार्ग से स्थापित हो गया है, जिससे अब केवल 2 किलोमीटर का सफर तय कर लोग मुख्य मार्ग तक पहुंच पा रहे हैं। स्थानीय निवासी राम प्रजापत ने अपनी खुशी साझा करते हुए बताया कि ईंट भट्टा चलाने के दौरान उनके कई वाहन पहले नदी में बह चुके हैं, लेकिन अब इस पुल के बनने से मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना, स्कूली बच्चों का स्कूल जाना और किसानों व व्यापारियों का मंडियों तक पहुंचना बेहद आसान हो गया है।

More Stories
Students Protest in Bhopal: नवीन हायर सेकेंडरी स्कूल में छात्रों का हंगामा, शिक्षिका बबीता कुशवाहा का हुआ तबादला
Madhya Pradesh Voter List: जबलपुर में 18 साल के युवाओं और कटे हुए नामों को जोड़ने के लिए लगेंगे कैंप, जानिए क्या है पूरी प्रक्रिया
MP Wildlife News: कूनो और गांधीसागर के बाद अब नौरादेही बनेगा चीतों का नया आशियाना, एनटीसीए से मिल चुकी है मंजूरी