रतलाम : मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में स्कूल और आंगनबाड़ियों में संचालित मध्याह्न भोजन (प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना) से जुड़े महिला स्वयं सहायता समूहों और रसोइयों की आर्थिक स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। जिले भर में रसोइयों को पिछले 5 महीने से उनका नियत वेतन (मानदेय) और स्वयं सहायता समूहों को पिछले 4 महीने से खाद्यान्न व सामग्री आपूर्ति का भुगतान नहीं किया गया है। इसके चलते अब स्वयं सहायता समूह आगे मध्याह्न भोजन पकाने और बच्चों को परोसने में पूरी तरह असमर्थता जता रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों और आंगनबाड़ियों में मध्याह्न भोजन संचालित करने वाले संगठनों ने रतलाम जिला मुख्यालय (कलेक्ट्रेट) पहुंचकर लंबित राशि तुरंत जारी करने की मांग उठाई है। वहीं, जिला पंचायत के अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी खराबी (Technical Error) के कारण बजट वितरण में देरी हुई है।
🏫 नए शैक्षणिक सत्र में मिला सिर्फ 1 बार पैसा; 2600 केंद्रों पर स्थिति चिंताजनक
भुगतान का वर्तमान गणित:
- 2600 केंद्रों पर प्रभाव: रतलाम जिले में कुल मिलाकर लगभग 2600 प्राथमिक स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जहां महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा रोजाना बच्चों के लिए ताजा मध्याह्न भोजन तैयार किया जाता है।
- बजट अटका: नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से लेकर अब तक इन महिला समूहों को केवल एक बार ही राशि का भुगतान हुआ है। इसके बाद से अब तक रसोइयों और समूहों को एक रुपये का भी आवंटन नहीं मिला है।
🏬 उधार लेकर जैसे-तैसे चल रहा था भोजन निर्माण; समूहों ने दिया अल्टीमेटम
स्वयं सहायता समूहों की आपबीती:
- व्यापारियों का कर्ज: कई महीनों से राशि न मिलने के कारण महिला समूहों को स्थानीय व्यापारियों और दुकानदारों से राशन व सामग्री उधार लेकर मध्याह्न भोजन पकाना पड़ रहा था। लेकिन अब दुकानदारों ने भी आगे उधार देने से मना कर दिया है।
- काम बंद करने की चेतावनी: महिला स्वयं सहायता समूह के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि दीपावली तक उनके सभी लंबित बिलों और रसोइयों के वेतन का पूर्ण भुगतान नहीं किया जाता है, तो वे जिले के सभी प्राथमिक स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भोजन बनाने का कार्य पूरी तरह बंद कर देंगे।
🎙️ तकनीकी खामी के कारण रुका भुगतान; जिला पंचायत सीईओ का आया आधिकारिक बयान
प्रशासन का पक्ष:
- सीईओ वैशाली जैन का आश्वासन: इस पूरे गंभीर मामले पर जिला पंचायत की सीईओ वैशाली जैन ने बताया कि “तकनीकी कारणों (पोर्टल व बैंकिंग इश्यू) की वजह से समूहों और रसोइयों के भुगतान में कुछ देरी हुई है। इस समस्या को जल्द ही सुलझा लिया जाएगा और स्वयं सहायता समूहों व रसोइयों के रुके हुए वेतन का शीघ्र भुगतान कर दिया जाएगा।”
- पोषण आहार प्रभावित होने का डर: बहरहाल, यदि समय रहते शासन द्वारा बजट जारी नहीं किया जाता है, तो जिले के हजारों नौनिहाल बच्चों को मिलने वाला प्रधानमंत्री पोषण आहार पूरी तरह से ठप होने की कगार पर पहुंच जाएगा।

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