रतलाम। शासकीय सांदीपनि विनोबा स्कूल के होनहार खिलाड़ियों ने संभागीय शाला खेलकूद प्रतियोगिता में अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर 16 मेडल जीतकर रतलाम जिले का नाम रोशन किया है।
प्रतियोगिता में एथलेटिक्स की 100 मीटर दौड़, रिले रेस, हाई जंप, लॉन्ग जंप और बाधा दौड़ जैसी कठिन स्पर्धाएं शामिल थीं। इसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 9 खिलाड़ियों ने गोल्ड मेडल हासिल कर राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए क्वालीफाई किया है। सबसे खास बात यह है कि यह ऐतिहासिक सफलता सभी खिलाड़ियों ने बुनियादी सुविधाओं और खेल संसाधनों के भारी अभाव के बावजूद हासिल की है।
🦶 कीचड़ भरे मैदान में नंगे पांव प्रैक्टिस: लगातार तीसरे साल राज्य स्तर के लिए चयन
एथलेटिक्स के लिए मानक मैदान, प्रॉपर रनिंग ट्रैक और आधुनिक सुविधाओं का सर्वथा अभाव होने के बावजूद इन बच्चों ने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से यह बड़ी उपलब्धि दर्ज की है।
यह लगातार तीसरा वर्ष है जब सांदीपनि विनोबा स्कूल के बच्चों का चयन राज्य स्तरीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता के लिए हुआ है। यही नहीं, इस स्कूल के एथलेटिक्स खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर (National Level) की प्रतियोगिताओं तक भी अपनी प्रतिभा की छाप छोड़ चुके हैं।
🏫 बच्चों को खेल से जोड़ने का प्रयास हुआ सफल: पुरानी इमारत में संचालित होता है स्कूल
गौरतलब है कि पहले सीएम राइज (CM RISE) और अब सांदीपनि विद्यालय के नाम से जाना जाने वाला यह शासकीय विनोबा स्कूल आज भी पुरानी और जर्जर बिल्डिंग में संचालित हो रहा है। यहां मुख्य रूप से आसपास की कच्ची बस्तियों के गरीब परिवारों के बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं।
स्कूल के खेल शिक्षक प्रहलाद दास बैरागी ने करीब 4 साल पहले इन बच्चों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें खेलों से जोड़ने की सकारात्मक पहल शुरू की थी। स्कूल के बाहर पड़ी खाली कच्ची जमीन पर कोई बड़ा मैदान तो नहीं बन सकता था, लेकिन बच्चों को एथलेटिक्स का अभ्यास कराने के लिए उन्होंने खुद लॉन्ग जंप पिट, हाई जंप और ट्रैक तैयार कराया। इसके साथ ही पास स्थित आईटीआई (ITI) ग्राउंड पर बच्चों को रनिंग का अभ्यास कराया जाता है।
🥇 संभागीय स्पर्धा में 16 मेडलों पर जमाया कब्जा: 9 खिलाड़ी खेलेंगे राज्य स्तरीय प्रतियोगिता
खेल शिक्षक प्रहलाद दास बैरागी ने बताया, “शुरुआत में बच्चों ने धीरे-धीरे एथलेटिक्स के अलग-अलग इवेंट्स में रुचि दिखाना शुरू किया। इसके बाद पिछले तीन सालों से हमारे स्कूल के छात्र 100 मीटर दौड़, रिले रेस और लॉन्ग जंप में लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बार भी संभागीय स्पर्धा में बच्चों ने कुल 16 मेडल जीते हैं, जिनमें से 9 खिलाड़ियों ने राज्य स्तरीय स्पर्धा का टिकट पक्का कर लिया है।”
👟 जूते शेयर करके प्रतियोगिता में लेते हैं हिस्सा: गरीबी भी नहीं रोक पाई हौसले की उड़ान
प्रहलाद दास बैरागी ने आगे बताया कि अधिकांश छात्र बेहद गरीब परिवारों से आते हैं और उनके पास एथलेटिक्स में दौड़ने के लिए स्पाइक वाले स्पेशल जूते (Spike Shoes) नहीं हैं। स्कूल प्रबंधन की ओर से कुछ जोड़ी स्पाइक जूते उपलब्ध कराए गए हैं, जिन्हें यह खिलाड़ी आपस में शेयर करके प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं।
लॉग जंप के राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी शिवराज तंवर ने बताया कि पिछले साल भी वह संभागीय और राज्य स्तरीय स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतकर नेशनल प्रतियोगिता के लिए चुने गए थे।
🏃♀️ बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी: नंगे पांव दौड़कर जीता 100 मीटर में गोल्ड
छात्र शिवराज ने बताया, “हमारे पास जूते नहीं होते थे और आईटीआई मैदान पर बैरागी सर हमें रोजाना प्रैक्टिस करवाते थे। जब भी हम किसी बड़ी स्पर्धा में भाग लेने जाते हैं तो आपस में जूते बदलकर काम चलाते हैं। हालांकि, अब कुछ साथियों के पास जूते आ गए हैं।”
वहीं, 11वीं की छात्रा लक्ष्मी नायक ने बताया कि उसने संभागीय स्पर्धा की 100 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल जीता है। अब तक वह मैदान पर नंगे पांव ही दौड़ने का अभ्यास करती थी।
बहरहाल, पर्याप्त सुविधाओं और ट्रैक के अभाव में भी रतलाम के इस शासकीय स्कूल के गरीब बच्चे अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं। यदि इन उदीयमान खिलाड़ियों को शासन की ओर से सही सुविधाएं और एथलेटिक्स का आधुनिक सिंथेटिक ट्रैक उपलब्ध करा दिया जाए, तो ये प्रतिभाएं मध्य प्रदेश का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रोशन कर सकती हैं।

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