September 23, 2026

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Rajgarh News Update: असफलता से सफलता तक! राजगढ़ के चिमन भूरिया बने असिस्टेंट प्रोफेसर (वाणिज्य), घर में खुशी की लहर

राजगढ़। मध्य प्रदेश के राजगढ़ नगर स्थित श्रीराम कॉलोनी में जश्न का माहौल है। यहाँ रहने वाली एक आंगनबाड़ी सहायिका के होनहार बेटे चिमन भूरिया ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की है। बेटे की इस ऐतिहासिक कामयाबी की खबर मिलते ही घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। चिमन भूरिया का चयन MPPSC के माध्यम से असिस्टेंट प्रोफेसर (वाणिज्य – Commerce) 2024 के द्वितीय श्रेणी राजपत्रित अधिकारी (Class-II Gazetted Officer) के पद पर हुआ है।

🎓 राजगढ़ और सरदारपुर से पूरी की पढ़ाई: 2016 में ही तय कर लिया था प्रशासनिक सेवा का लक्ष्य

चिमन भूरिया ने अपनी शुरुआती हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी की शिक्षा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय राजगढ़ से प्राप्त की।

इसके बाद उन्होंने ग्रेजुएशन (UG) और पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) की पढ़ाई श्रीराजेन्द्रशूरी शासकीय महाविद्यालय, सरदारपुर से पूरी की। वर्ष 2016 में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के साथ ही उन्होंने राज्य प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज की सेवा करने का लक्ष्य निर्धारित कर लिया था।

🔄 लगातार 5 साल की असफलता से नहीं टूटे: कमियों को सुधारकर जारी रखा संघर्ष

अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए चिमन ने वर्ष 2020 से 2025 तक लगातार MPPSC राज्य सेवा मुख्य परीक्षा (Mains) में कई प्रयास किए।

चिमन ने अपनी संघर्ष गाथा साझा करते हुए बताया कि इन वर्षों में लगातार असफलता मिलने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने असफलताओं को अपनी राह की बाधा नहीं बनने दिया, बल्कि हर प्रयास के बाद अपनी कमियों की पहचान कर तैयारी को और मजबूत किया। इसी निरंतर मेहनत का सुखद परिणाम रहा कि वे असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर चयनित हो गए।

💔 पिता के निधन के बाद माँ बनीं संबल: सीमित संसाधनों में आंगनबाड़ी सहायिका माँ ने दिया साथ

चिमन के संघर्ष की राह आसान नहीं थी। वर्ष 2021 में उनके पिता स्व. कालूसिंह भूरिया के असमय निधन के बाद परिवार पर आर्थिक संकट गहरा गया था।

सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद चिमन ने पढ़ाई जारी रखी। उनकी माँ, जो एक आंगनबाड़ी सहायिका हैं, उनके संघर्ष, त्याग और अटूट विश्वास ने चिमन को हर परिस्थिति में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। चिमन का कहना है कि उनकी सफलता इस बात की मिसाल है कि यदि संकल्प दृढ़ हो तो बड़ी से बड़ी बाधा को पार किया जा सकता है।

📚 ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को तराशने का संकल्प: क्षेत्रवासियों ने दी बधाइयां

चयन के बाद चिमन भूरिया ने अपनी प्राथमिकताएं साझा करते हुए कहा कि वे असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और रोजगारोन्मुख शिक्षा देने का प्रयास करेंगे।

उनका विशेष उद्देश्य ग्रामीण अंचल और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के लिए मार्गदर्शन देना रहेगा। चिमन भूरिया की इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर परिजनों, गुरुजनों, मित्रों और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं।

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