November 2, 2026

News Prawah

UDYAM-MP-49-0001253

Political News Updates: संख्याबल न होने के बावजूद कांग्रेस का बड़ा सियासी दांव, चुनाव आयोग से की कड़ी मॉनिटरिंग की मांग

मध्य प्रदेश में राज्यसभा उपचुनाव के दौरान राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का इस उपचुनाव में निर्विरोध निर्वाचित होना अब संभव नहीं है। उनके मुकाबले निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर राजकुमार लोहानी ने अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है, जिन्हें मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी ने अपना खुला समर्थन प्रदान किया है। नामांकन दाखिल करने के दौरान कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे उनके प्रस्तावक बने, जबकि इस मौके पर कांग्रेस के कई अन्य विधायक और वरिष्ठ नेता भी उपस्थित रहे। उम्मीदवार राजकुमार लोहानी मूल रूप से भोपाल के पुराने शहर के घोड़ानक्कास इलाके के रहने वाले हैं और वहां मोबाइल एसेसरीज की दुकान संचालित करते हैं।

🗳️ कांग्रेस विधायकों का मिला साथ; हेमंत कटारे बोले—’जनता की भावना है कि प्रत्याशी स्थानीय होना चाहिए’

नामांकन प्रक्रिया और कांग्रेस का पक्ष:

  • अंतिम दिन भरा पर्चा: राज्यसभा निर्वाचन के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि 2 नवंबर थी। आखिरी दिन राजकुमार लोहानी ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरकर पर्चा भरा।
  • प्रमुख नेता रहे मौजूद: इस महत्वपूर्ण अवसर पर कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे, महेश परमार, आतिफ अकील, अभिजीत शाह, सुरेन्द्र सिंह हनी बघेल और कांग्रेस प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
  • कांग्रेस का बयान: विधायक हेमंत कटारे ने मीडिया से बातचीत में कहा कि राजकुमार लोहानी ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर सहयोग मांगा था, जिसके बाद कांग्रेस ने उन्हें पूरा समर्थन देने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता और स्थानीय नागरिकों की यह स्पष्ट भावना है कि जनप्रतिनिधि स्थानीय होना चाहिए, न कि बाहरी व्यक्ति को थोपा जाए। साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग से इस पूरी चुनावी प्रक्रिया की कड़ी मॉनिटरिंग करने की मांग की है।
♟️ संख्याबल न होने के बावजूद कांग्रेस का सियासी दांव; विश्लेषकों की क्या है राय?

राजनीतिक समीकरण और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया:

  • सदन में भाजपा का बहुमत: विधानसभा के मौजूदा संख्याबल और आंकड़े को देखा जाए तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) सदन में बेहद मजबूत स्थिति में है। यदि कांग्रेस अपने दम पर आधिकारिक उम्मीदवार उतारती, तो उसे जिताने के लिए पर्याप्त विधायकों का समर्थन उसके पास मौजूद नहीं था।
  • रणनीतिक कदम: यही मुख्य वजह है कि कांग्रेस ने किसी पार्टी चेहरे के बजाय एक निर्दलीय और स्थानीय नागरिक को आगे बढ़ाकर पीछे से समर्थन देने का अनूठा सियासी दांव खेला है।
  • विश्लेषकों का आकलन: वरिष्ठ पत्रकार केडी शर्मा के अनुसार, निर्दलीय उम्मीदवार को उतारकर कांग्रेस ने एक सुरक्षित और सधा हुआ राजनीतिक संदेश दिया है, जिससे परिणाम चाहे जो भी हों, पार्टी की साख पर सीधा नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
Share to...