April 29, 2026

News Prawah

UDYAM-MP-49-0001253

पीएम मोदी ने उत्तरप्रदेश को दी सौगात, हजारो करोड़ की लागत से बने गंगा एक्सप्रेसवे का किया लोकार्पण

उत्तरप्रदेश: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज उत्तर प्रदेश को एक और बड़ी सौगात दी है। हरदोई जिले में आयोजित एक भव्य समारोह में पीएम मोदी ने ‘गंगा एक्सप्रेसवे’ का लोकार्पण किया।

इस ऐतिहासिक पल के लिए मेरठ के बिजौली से लेकर प्रयागराज तक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस एक्सप्रेसवे के शुरू होते ही मेरठ से प्रयागराज की दूरी न केवल कम होगी, बल्कि यूपी के 12 जिलों के लिए औद्योगिक विकास के नए द्वार भी खुलेंगे। दरअसल, 36,230 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बना यह एक्सप्रेसवे यूपी के 12 जिलों और 519 गांवों की तकदीर बदलने वाला है। 594 किलोमीटर लंबा यह 6-लेन एक्सप्रेसवे मेरठ से शुरू होकर प्रयागराज तक जाता है, जिसे जरूरत पड़ने पर 8-लेन तक विस्तार दिया जा सकता है।

इन 12 जिलों से गुजरेगा गंगा एक्सप्रेसवे: मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़
प्रयागराज।

दरअसल, अभी तक मेरठ से प्रयागराज जाने में करीब 12 घंटे का समय लगता था, लेकिन अब यह सफर मात्र 6 घंटे में पूरा हो जाएगा। गंगा एक्सप्रेसवे पर वाहन 120 किमी प्रति घंटा तक की स्पीड से फर्राटा भर सकेंगे। सुरक्षा और सुविधा के लिए मार्ग पर कई फ्लाईओवर, पुल और सुविधा केंद्र बनाए गए हैं।

क्या है ‘गंगा एक्सप्रेसवे’ की सबसे बड़ी खासियत?

इसकी सबसे बड़ी खासियत शाहजहांपुर के पास बना 3.5 किलोमीटर लंबा इमरजेंसी रनवे है। युद्ध की स्थिति या आपातकालीन समय में यहां भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमान भी लैंड कर सकेंगे। इसके अलावा, भविष्य में इसे 83 किलोमीटर लंबी लिंक रोड के जरिए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) और यमुना एक्सप्रेसवे से भी जोड़ा जाएगा।

हालांकि सरकार ने अभी टोल की आधिकारिक दरों की फाइनल लिस्ट जारी नहीं की है, लेकिन प्रति किलोमीटर के हिसाब से अनुमानित आंकड़े सामने आ गए हैं। मेरठ से प्रयागराज तक कार के लिए लगभग 1515 रुपये और बस-ट्रक के लिए 2405 रुपये टोल देना पड़ सकता है।

क्या है मल्टी लेन फ्री फ्लो तकनीक?

वहीं, पहले चरण (मेरठ से बदायूं) के 130 किमी के लिए कार का टोल ₹435 तय किया जा सकता है। यात्रियों की सुविधा के लिए यहां MLFF (मल्टी लेन फ्री फ्लो) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे प्रवेश के समय गाड़ियों को रुकना नहीं पड़ेगा; सेंसर चलते वाहन को खुद स्कैन कर लेंगे।

यह एक्सप्रेसवे सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि एक आर्थिक गलियारा है। इसके किनारे औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं, जिससे बदायूं और हरदोई जैसे जिलों में फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स को बड़ा बाजार मिलेगा। प्रयागराज के प्रसिद्ध ‘सेबिया अमरूद’ और प्रतापगढ़ के कृषि उत्पादों को अब आसानी से दिल्ली-NCR की मंडियों तक पहुंचाया जा सकेगा। इससे लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के हजारों अवसर पैदा होंगे। विशेष तौर पर संगम नगरी के अमरूद किसानों के लिए अब यूरोप तक के रास्ते आसान हो जाएंगे।

गंगा एक्सप्रेसवे के अलावा यूपी में कनेक्टिविटी को लेकर कई और बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का काम तेजी पर है, वहीं बेंगलुरु-चेन्नई एक्सप्रेसवे भी अंतिम चरण में है। साथ ही दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे के भी मार्च 2028 तक पूरी तरह ऑपरेशनल होने की उम्मीद है। गंगा एक्सप्रेसवे पर दोपहिया वाहनों का चलना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

Share to...