April 28, 2026

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अब नाम के आगे डॉक्टर नहीं लगा सकेंगे फिजियोथेरेपिस्ट, सरकार ने जारी किया आदेश

नईदिल्ली: बीमारी का इलाज करने वाले सभी लोगों को हम डॉक्टर कहते हैं, लोकिन अब नियम बदल गया है। किसको अपने नाम के आगे डॉक्टर लगाना है और किसको नहीं, इसका सख्ती से पालन किया जाएगा। अब फिजियोथेरेपिस्ट अपने नाम के आगे डॉक्टर शब्द का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं।

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय ने आदेश जारी किया है, जिसके तहत फिजियोथेरेपिस्ट अपना नाम डॉ. से शुरू नहीं कर सकते हैं। इस बारे में स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ. सुनीता शर्मा ने कहा कि अब से सिर्फ मेडिकल डॉक्टर्स ही अपने नाम के आगे डॉक्टर लगा सकते हैं। फिजियोथेरेपिस्ट्स को ये टाइटल इस्तेमाल करने की इजाज़त नहीं है, क्योंकि इससे मरीजों और आम लोगों में भ्रम पैदा होता है और इससे ‘क्वैकरी’ (नकली इलाज) को बढ़ावा मिल सकता है।

अपने पत्र में, डीजीएचएस ने कहा कि निदेशालय को भारत में फिजियोथेरेपिस्टों द्वारा अपने नाम के आगे ‘डॉ’ और पीछे ‘पीटी’ लगाने के संबंध में भारतीय भौतिक चिकित्सा एवं पुनर्वास संघ (आईएपीएमआर) सहित विभिन्न संगठनों से कई ज्ञापन और कड़ी आपत्तियां प्राप्त हुई हैं। आईएपीएमआर द्वारा उठाई गई आपत्तियों का हवाला देते हुए, डीजीएचएस ने कहा कि फिजियोथेरेपिस्टों को मेडिकल चिकित्सक के रूप में प्रशिक्षित नहीं किया जाता है, इसलिए उन्हें ‘डॉ’ का प्रयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह रोगियों और आम जनता को गुमराह करता है, जिससे संभावित रूप से धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है।

फिजियोथेरेपिस्टों को प्राथमिक चिकित्सा प्रदान करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और उन्हें केवल रेफर किए गए रोगियों का ही इलाज करना चाहिए, क्योंकि उन्हें ऐसी चिकित्सा स्थितियों का इलाज करने के लिए प्रशिक्षित नहीं किया जाता है जो अनुचित फिजियोथेरेपी हस्तक्षेप से बिगड़ सकती हैं।

पत्र में आगे कहा गया है, ” पटना हाई कोर्ट, तमिलनाडु मेडिकल काउंसिल, बेंगलुरु कोर्ट और मद्रास हाई कोर्ट ने पहले ही इस बात पर फैसला दिया है कि अगर कोई फिजियोथेरेपिस्ट Dr. टाइटल बिना मेडिकल रजिस्ट्रेशन के लगाता है, तो यह गैरकानूनी है।

डॉ. सुनीता शर्मा ने यह भी अनुरोध किया है कि नए Physiotherapy Curriculum 2025, जिसे हाल ही में NCAHP ने जारी किया है, उसमें Dr. का प्रयोग न रखा जाए, इसके बजाय Physiotherapist जैसा स्पष्ट और सम्मानजनक टाइटल इस्तेमाल हो, जिससे मरीजों को गलतफहमी न हो।

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