October 3, 2026

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Madhya Pradesh Pollution Control Board: आबादी और स्कूलों के पास चल रहे अवैध क्रशर होंगे सील, एनजीटी का बड़ा फैसला

मध्य प्रदेश में स्टोन क्रशर इकाइयों के संचालन और पर्यावरणीय मानकों के पालन को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच ने क्रशर इकाइयों द्वारा किए जा रहे वास्तविक उत्पादन की सटीक निगरानी करने के लिए उनकी मासिक बिजली खपत को मुख्य आधार बनाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) को बिजली वितरण कंपनियों से क्रशर इकाइयों के बिजली उपयोग का रिकॉर्ड मांगकर उनकी मशीनरी की क्षमता और ऊर्जा खपत से मिलान करने को कहा गया है, जिससे कागजी आंकड़ों और वास्तविकता के फर्क को आसानी से पकड़ा जा सके।

🚫 संवेदनशील क्षेत्रों में संचालित क्रशर इकाइयों पर गिरेगी गाज: वैध अनुमति और एनओसी न होने पर इकाइयां होंगी सील

आदेश के अनुसार, आबादी, स्कूलों, अस्पतालों और मंदिरों जैसे संवेदनशील स्थानों से 500 मीटर की परिधि के भीतर अवैध रूप से संचालित हो रही क्रशर इकाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जिन इकाइयों के पास वैध पर्यावरणीय अनुमति (Environmental Clearance), ‘कन्सेंट टू एस्टेब्लिश’ (CTE) और ‘कन्सेंट टू ऑपरेट’ (CTO) नहीं है, उन्हें तुरंत बंद या सील किया जाएगा। इसके अलावा, भू-जल का उपयोग करने वाली सभी क्रशर इकाइयों के लिए केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) से एनओसी लेना अनिवार्य कर दिया गया है।

🌱 धूल नियंत्रण और हरित पट्टी विकसित करने पर जोर: खनिज विभाग के पोर्टल से जुड़ेंगे आंकड़े

पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए एनजीटी ने क्रशर क्षेत्रों में पीएम-10 और पीएम-2.5 जैसे वायु प्रदूषण कणों की नियमित निगरानी, धूल उड़ने से रोकने के लिए पानी का छिड़काव, कच्चे माल को ढंककर रखना, कन्वेयर बेल्ट पर मिस्ट स्प्रे लगाने और कम से कम पांच मीटर चौड़ी हरित पट्टी (Green Belt) विकसित करने जैसे निर्देश दिए हैं। साथ ही, खनिज विभाग के पोर्टल और ई-ट्रांजिट पास व्यवस्था को आपस में जोड़ने से खनन, परिवहन और क्रशर संचालन के आंकड़ों का सटीक मिलान संभव हो सकेगा।

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