October 5, 2026

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Madhya Pradesh News: मां नर्मदा की गहराई जानने के लिए भोपाल की टीम ने किया स्कूबा डाइविंग अभियान, नाविक संघ ने की सफाई की मांग

मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी के रहस्यों और उसकी वास्तविक गहराई को जानने के लिए पहली बार एक रोमांचक और प्रोफेशनल स्कूबा डाइविंग अभियान चलाया गया। प्रसिद्ध झूले पुल के नीचे नदी के ठंडे और गहरे पानी में उतरे प्रशिक्षित स्कूबा डाइवर ने नदी के तल का बारीकी से निरीक्षण किया। पानी के भीतर अत्यधिक अंधेरे और बढ़ते दबाव के बीच टॉर्च की रोशनी में किए गए इस विशेष निरीक्षण के दौरान बड़े-बड़े चट्टानी पत्थरों के बीच कुछ प्राचीन मूर्तियां, सिक्के और छोटे पौधे नजर आए, हालांकि डाइविंग के दौरान किसी भी प्रकार के कीमती आभूषण मिलने की पुष्टि नहीं हुई है।

🤿 भोपाल की टीम ने किया अभियान: PADI मास्टर इंस्ट्रक्टर यासिर हसीब ने तय की 210 फीट की गहराई

यह पूरा अभियान ‘मां रेवा मांझी नाविक संघ’ के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसे भोपाल की पायनियर वॉटर स्पोर्ट्स टीम ने अंजाम दिया। पेशेवर PADI गाइड मास्टर इंस्ट्रक्टर यासिर हसीब ने विशेष उपकरणों और ऑक्सीजन सिलेंडरों की मदद से लगभग 210 फीट की गहराई तक उतरकर नर्मदा नदी के तल का प्रत्यक्ष जायजा लिया। यासिर हसीब ने बताया कि जैसे-जैसे वे गहराई में उतरे, पानी का दबाव भी बढ़ता गया, लेकिन सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करते हुए उन्होंने नदी तल की स्थिति को परखा। स्थानीय नाविक लंबे समय से यहाँ की गहराई 300 से 350 फीट होने का अनुमान लगाते रहे हैं, और इस पहली प्रोफेशनल डाइविंग से मिले आंकड़ों ने नदी की भौगोलिक स्थिति को समझने का एक नया जरिया दिया है।

🧹 नाविक संघ ने की नदी संरक्षण और सफाई की मांग: वैज्ञानिक सर्वे की जताई आवश्यकता

इस डाइविंग के दौरान नदी के भीतर अत्यधिक गंदगी या कचरा नहीं दिखाई दिया, जो एक सकारात्मक संकेत है। हालांकि, इतनी गहराई में डाइविंग करने के लिए काफी तकनीकी विशेषज्ञता और महंगी गैस का उपयोग होता है, जिसमें एक बार की डाइव पर 10 से 12 हजार रुपए तक का खर्च आता है। माँ रेवा मांझी नाविक संघ के अध्यक्ष भोलाराम केवट ने कहा कि नर्मदा ओंकारेश्वर की जीवनरेखा है और इसके प्राकृतिक स्वरूप को बचाने के लिए वैज्ञानिक तरीकों से व्यापक सफाई और संरक्षण अभियान चलाने की सख्त जरूरत है, ताकि नदी की पवित्रता और जलीय पारिस्थितिकी सुरक्षित रह सके।

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