देशभर में जहां प्रति व्यक्ति वर्षभर में औसतन 106 अंडे उपलब्ध हैं, वहीं मध्य प्रदेश में यह आंकड़ा मात्र 35 तक ही सीमित है। इसका मतलब है कि एमपी की थाली राष्ट्रीय औसत से करीब 71 अंडे पीछे चल रही है। इसके विपरीत, दक्षिण भारतीय राज्यों जैसे आंध्र प्रदेश में प्रति व्यक्ति सालाना उपलब्धता 514 अंडे है, जो मध्य प्रदेश से लगभग 15 गुना अधिक है। यह अंतर केवल खानपान की आदतों का नहीं, बल्कि राज्य में अंडा उत्पादन, पोल्ट्री उद्योग और सुदृढ़ आपूर्ति व्यवस्था को बढ़ावा देने की गंभीर आवश्यकता को दर्शाता है।
📉 चार साल की बढ़त के बाद 24 करोड़ अंडों की आई गिरावट, उत्पादन घटकर हुआ 307 करोड़
केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी विभाग की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश में वर्ष 2020-21 से 2023-24 तक अंडा उत्पादन में लगातार तेजी आई थी और उत्पादन 265 करोड़ से बढ़कर 349 करोड़ तक पहुंच गया था। हालांकि, वर्ष 2024-25 में यह रफ्तार थम गई और उत्पादन गिरकर 307.27 करोड़ पर आ गया। यानी एक साल के भीतर करीब 42 करोड़ अंडों के उत्पादन में कमी दर्ज की गई, जिसके चलते प्रति व्यक्ति उपलब्धता भी 40 से घटकर 35 पर आ गई, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।
🐔 पोल्ट्री इंडस्ट्री की चुनौतियां और पोषण का महत्व
विशेषज्ञों और पोल्ट्री कारोबारियों के अनुसार, चारा, बिजली, दवाइयों और चूजे मंगाने की बढ़ती लागत के कारण किसानों व फार्म संचालकों का मुनाफा घट रहा है। छोटे पोल्ट्री फार्मों को सरकारी सहायता और सस्ती बिजली की दरें मिलने पर ही उत्पादन में सुधार हो सकता है। दूसरी ओर, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एक अंडे में 6 से 7 ग्राम उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन, सभी आवश्यक अमीनो एसिड, विटामिन बी12, कोलीन और सेलेनियम जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो मांसपेशियों के विकास, बच्चों की सेहत और मस्तिष्क के सुचारु कामकाज के लिए बेहद जरूरी हैं।

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