September 20, 2026

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Gwalior News Today: बिरलानगर सिविल अस्पताल में अटका इलाज; सैंपल लक्ष्मीगंज-हजीरा भेजने को मजबूर प्रबंधन, मरीज परेशान

ग्वालियर। सिविल अस्पताल बिरलानगर में पैथोलॉजी लैब की सुविधा शुरू न होने के कारण दूर-दराज से आने वाले मरीजों को अपनी जांच रिपोर्ट के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। अत्यंत चिंताजनक बात यह है कि राज्य शासन से लैब संचालन की प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद सभी आवश्यक और आधुनिक मशीनों की सप्लाई भी अस्पताल को काफी समय पहले हो चुकी है। अस्पताल प्रबंधन ने पूर्व में जुलाई माह के अंत तक हर हाल में लैब शुरू करने का दावा किया था, लेकिन वह समय सीमा बीत जाने के बाद अब पुनः एक सप्ताह के भीतर लैब चालू करने का नया आश्वासन दिया जा रहा है।

🧪 केवल सैंपल कलेक्शन सेंटर के भरोसे चल रहा काम: जांच के लिए लक्ष्मीगंज और हजीरा भेजे जा रहे सैंपल

उल्लेखनीय है कि बिरलानगर प्रसूति गृह का बुनियादी विस्तार करके इसे सिविल अस्पताल का दर्जा तो दे दिया गया, लेकिन पूर्णकालिक पैथोलॉजी सुविधा चालू न होने से क्षेत्रीय मरीजों को इसका वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है।

वर्तमान में अस्पताल में केवल एक सैंपल कलेक्शन सेंटर संचालित किया जा रहा है। यहाँ प्रतिदिन आने वाले मरीजों के रक्त (ब्लड) और अन्य पैथोलॉजिकल नमूने तो एकत्र किए जाते हैं, लेकिन उन्हें जांच प्रक्रिया के लिए लक्ष्मीगंज प्रसूति गृह और सिविल अस्पताल हजीरा भेजा जाता है।

⏳ रिपोर्ट के इंतजार में अटक रहा मरीजों का इलाज: गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों की बढ़ी परेशानी

नमूने दूसरे दूरस्थ अस्पतालों में भेजे जाने के कारण रिपोर्ट तैयार होकर वापस आने में चार से पांच दिनों तक का लंबा समय लग रहा है।

इस देरी का सीधा और गंभीर असर आपातकालीन मरीजों तथा गर्भवती महिलाओं के उपचार पर पड़ रहा है। चिकित्सकों को कई संवेदनशील मामलों में जब तक जांच रिपोर्ट हाथ में नहीं आ जाती, तब तक इलाज की आगे की प्रक्रिया तय करने के लिए मजबूरन इंतजार करना पड़ता है।

⚙️ अब एक सप्ताह में लैब चालू करने का दावा: उपकरण इंस्टालेशन का काम अंतिम चरण में

मरीजों को हो रही इस निरंतर असुविधा को देखते हुए शासन ने बिरलानगर अस्पताल में ही स्वतंत्र पैथोलॉजी लैब स्थापित करने की मंजूरी दी थी।

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि लैब पूरी तरह तैयार की जा रही है और सभी उपकरणों का इंस्टालेशन काम अंतिम चरण में है। सभी तकनीकी प्रक्रियाएं पूर्ण होते ही जांच सुविधा विधिवत शुरू कर दी जाएगी। इसके बाद मरीजों की सभी पैथोलॉजिकल जांचें इसी अस्पताल में हो सकेंगी, जिससे दूसरे अस्पतालों पर उनकी निर्भरता पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

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