April 18, 2026

News Prawah

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डिजिटल माध्यमों में हिन्दी का प्रयोग विस्तार जरूरी

पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी की जयंती पर  विशेष कार्यक्रम हुआ। स्वार्थ पर आधारित राजनीति समाज तोडती है जबकि परमारर्थ पर आधारित भाषा जोडती है। वसुधैव कुटुम्बकम् भारतीय संस्कृति का मूल भाव है। अगर इसे संपूर्ण विश्व में फैलाना है तो हिंदी का विस्तार जरूरी है। क्योंकि जैसे-जैसे लोग हिंदी को समझने लगेंगे वो वसुधैव कुटुम्बकम् में निहितार्थ भाव को कहीं बेहतर तरीके से जानने लगेंगे।
इसलिए दुनिया को शांति का संदेश देने और एकसूत्र में पिरोने के लिए हिंदी का प्रचार.प्रसार जरूरी है। ये संवेदना शून्य युग है। इसमें व्यक्ति और संवेदना के बीच सेतु बंधन के लिए हिंदी जैसी यथेष्ठ भाषा का ज्ञान होना नितांत आवश्यक है। खासतौर पर डिजिटल माध्यमों पर हिंदी का प्रयोग बढ़ाया जाना बेहद जरूरी है, ताकि नई पीढ़ी भी इस महान भाषा से सहजता से जुड़ सके। ये बाते मंगलवार शाम हिंदी साहित्य समिति में आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने कही। जिसका आयोजन ख्यात कवि एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना द्वारा किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विक्रम विश्वविद्यालय कुलानुशासक डॉ शैलेन्द्र कुमार शर्मा एवं मुख्य अतिथि सम्पादक देवपुत्र कृष्ण कुमार अष्ठाना रहे।

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