मध्य प्रदेश का गुना जिला इन दिनों कृषि क्षेत्र में एक अनूठी मिसाल पेश कर रहा है। यहां के किसानों का ‘गुना गुलाब गुनिया और देखेगी सारी दुनिया’ स्लोगन प्रदेश भर के पारंपरिक अन्नदाताओं के लिए एक प्रेरणा बन चुका है। गुना के कई किसानों ने पारंपरिक फसलों से हटकर आधुनिक तरीके से गुलाब के फूलों की खेती अपना ली है, जिससे उनकी आय में जबरदस्त बढ़ोतरी हो रही है और वे कम जमीन में भी लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं।
💡 पॉलीहाउस और फूलों की खेती से हो रही लाखों की आमदनी
गुना में कई किसान आधुनिक पॉलीहाउस तकनीक के जरिए खेती कर रहे हैं। पॉलीहाउस में गुलाब के अलावा सनफ्लावर, रजनीगंधा, ऑर्किड, जरबेरा और जिप्सी जैसे विभिन्न प्रकार के फूल उगाए जाते हैं। पिछले 20 वर्षों से फूलों की खेती कर रहे किसान पवन कुशवाहा ने बताया कि उन्होंने एक बीघा जमीन में सफेद, लाल और गुलाबी गुलाब लगा रखे हैं, जिससे उन्हें हर महीने 15 से 20 हजार रुपये यानी सालभर में 2 लाख रुपये से अधिक की शुद्ध आमदनी हो रही है। बारिश के ऑफ-सीजन में जहां उत्पादन थोड़ा कम (5 से 6 किलो प्रति बीघा) होता है और भाव 50 से 100 रुपये प्रति किलो तक मिलते हैं, वहीं शादी-ब्याह के सीजन में यही गुलाब 200 से 400 रुपये प्रति किलो तक बिकता है।
🌱 बेहतर रखरखाव, खाद और प्रशासनिक प्रोत्साहन
फ्लावर विक्रेता गजानंद कुशवाह के अनुसार, सीजन के दौरान फूलों की मांग बहुत अधिक बढ़ जाती है। गुलाब की अच्छी पैदावार के लिए गोबर की खाद, उचित कटिंग और समय पर कीटनाशक दवाओं का उपयोग बेहद जरूरी होता है। इसके साथ ही, जिला प्रशासन और कलेक्टर भी किसानों को गुलाब की खेती के लिए लगातार प्रेरित कर रहे हैं और उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिला रहे हैं ताकि अधिक से अधिक किसान इस लाभकारी व्यवसाय से जुड़कर आर्थिक रूप से मजबूत बन सकें।

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