चीन में बढ़ती बेरोजगारी और नौकरी के बाजार में बढ़ती कॉम्पिटिशन के बीच युवाओं का भरोसा अब सिर्फ डिग्री, स्किल और नौकरी की तैयारी तक नहीं रह गया है. नौकरी और बेहतर करियर की उम्मीद में बड़ी संख्या में युवा मंदिरों का रुख कर रहे हैं. वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में करीब हर तीन में से एक युवा नौकरी पाने या करियर में सफलता के लिए मंदिर जाकर प्रार्थना कर रहा है. इनमें शंघाई का ऐतिहासिक Longhua Temple सबसे ज्यादा पॉपुलर हो रहा है.
चीन के युवाओं के लिए मंदिर अब सिर्फ धार्मिक आस्था की जगह नहीं रह गए हैं. यहां युवा नौकरी मिलने, बेहतर सैलरी, परीक्षा में सफलता और करियर में स्थिरता के लिए मन्नत मांग रहे हैं. कई युवा मंदिरों में जाकर अगरबत्ती जलाते हैं, प्रार्थना करते हैं और भगवान के सामने घुटने टेककर अपनी मनोकामना पूरी होने की कामना करते हैं. शंघाई का Longhua Temple इस ट्रेंड का बड़ा सेंटर बनकर सामने आया है. यह चीन के सबसे पुराने और फेमस बौद्ध मंदिरों में शामिल है. यहां युवाओं की बढ़ती संख्या बताती है कि आर्थिक दबाव के बीच वे पारंपरिक धार्मिक आस्था में उम्मीद तलाश रहे हैं.
आखिर क्यों बढ़ा मंदिरों का रुख?
चीन में युवाओं के लिए नौकरी पाना लगातार मुश्किल होता जा रहा है. पढ़े-लिखे युवाओं की बड़ी संख्या कम नौकरियों के लिए कॉम्पिटिशन कर रही है. इसके अलावा इनकम में उम्मीद के मुताबिक बढ़ोतरी नहीं होने और आर्थिक अनिश्चितता के कारण युवाओं में फ्यूचर को लेकर चिंता बढ़ी है. कई युवाओं को लगता है कि सिर्फ अच्छी पढ़ाई और मेहनत से नौकरी और आर्थिक स्थिरता की गारंटी नहीं मिल रही. ऐसे में मंदिर उनके लिए मानसिक राहत और उम्मीद का एक जरिया बन रहे हैं.
अगरबत्ती से लेकर मंत्रों तक
मंदिर पहुंचने वाले युवा करियर में सफलता के लिए अगरबत्ती जलाते हैं, सामूहिक प्रार्थना में शामिल होते हैं और मंत्रों का जाप करते हैं. कुछ लोग मंदिर में भगवान की मूर्तियों के सामने झुककर नौकरी और बेहतर फ्यूचर की मन्नत मांगते हैं. यह ट्रेंड चीन के युवाओं की बदलती आर्थिक और सोशल कंडीशन को भी दिखाता है, जहां नौकरी की तलाश अब सिर्फ रोजगार का सवाल नहीं, बल्कि फ्यूचर की सिक्योरिटी और स्थिरता से भी जुड़ गई है.

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