मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल डिंडौरी जिले में छात्रावासों में रहने वाले बच्चों के पास दौड़ने और फुटबॉल खेलने के लिए जूते तक नहीं थे। बारिश के इस सीजन में कीचड़ भरे मैदानों पर बिना जूतों के खेलना बच्चों के लिए काफी जोखिम भरा था, जिससे संक्रमण और कीड़े-मकोड़ों का खतरा हमेशा बना रहता था और उनकी खेल गतिविधियां भी सीमित हो गई थीं। जब इस समस्या की जानकारी कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया को लगी, तो उन्होंने संवेदनशीलता दिखाते हुए ‘सोल ऑफ सोल’ (Soul of Soul) अभियान की शुरुआत की, जिसके तहत अब तक करीब 200 बच्चों को नए जूते और मौजे वितरित किए जा चुके हैं।
🏫 औचक निरीक्षण के दौरान सामने आई थी समस्या, माओवाद प्रभावित गौराकन्हारी से हुई अभियान की शुरुआत
दरअसल, कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया 7 अगस्त को अमरपुर के एक छात्रावास का निरीक्षण करने पहुँची थीं। वहाँ खेल गतिविधियां ठप मिलने पर जब उन्होंने कारण पूछा, तो बच्चों ने बताया कि उनके पास पहनने के लिए जूते नहीं हैं। इस पर कलेक्टर ने जिले के सभी छात्रावासों के बच्चों को जूते उपलब्ध कराने की योजना बनाई। इस अभियान की आधिकारिक शुरुआत 29 अगस्त को एक समय के माओवाद प्रभावित क्षेत्र रहे गौराकन्हारी के आदिवासी बालक छात्रावास से की गई, जहाँ कलेक्टर ने खुद अपने हाथों से बच्चों को जूते और मौजे पहनाए, जिससे बच्चों के चेहरे खिल उठे।
💰 सरकारी फंड के अभाव में अधिकारियों ने खुद आगे आकर जुटाए पैसे, सभी 144 छात्रावासों तक पहुंचेगा अभियान
यह समस्या केवल अमरपुर तक सीमित नहीं थी, बल्कि जिले के सभी 144 छात्रावासों में रहने वाले बड़ी संख्या में विद्यार्थी बिना जूते-चप्पल के रहने को मजबूर थे। इसके लिए जब कोई शासकीय फंड उपलब्ध नहीं था, तो जिले के अधिकारियों ने खुद आगे आकर आपस में पैसे जुटाए। इसके साथ ही बैंकों के सीएसआर (CSR) फंड से भी इस नेक काम को जोड़ने की पूरी तैयारी की जा रही है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि इस अभियान को जिले के हर एक छात्रावास तक पहुँचाया जाएगा ताकि कोई भी बच्चा बुनियादी सुविधाओं से वंचित न रहे।

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