लोकेंद्र तंवर, नागदा।
मैं ईश्वर पर विश्वास कर अकेले चलता रहा और उसने काफिला खड़ा कर दिया। मेने बस मुठी भर मांगा और उसने झोली भर दिया।उक्त कहावत को चरितार्थ करते है ।व्यापारी रवि चौहान जो नागदा बस स्टैंड पर निवास करते है। जो पेशे से अनाज व्यापारी है। जिनके नेतृत्व मैं प्रत्येक मंगवार को भक्तो का तांता 15 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर डेलनपुर बालाजी मंदिर पहुँचता है।
दरअसल यात्रा संचालक रवि चौहान बताते है कि यह बालाजी की ही कृपा है कि वो अपने भक्तों को दर्शन के लिए बुलाते है और इसका श्रय मुझे दिलाते है।
गौरतलब है की दुकान पर बैठें बैठे एक दिन व्यापारी रवि के मन मे डेलनपुर पैदल जाने का ख्याल आया और वे मन बना अपनी दुकान मंगल कर नंगे पांव डेलनपुर की यात्रा के लिए निकल गए। जहाँ व्यपारी को पैदल व नंगे पांव जाते देख कई लोगो ने मजाक भी बनाया और कहियो ने तो व्यापारी के पागल हो जाने के क्यास तक लगाना सुरू कर दिए। लेकिन कोई भी व्यापारी के मन के भाव को नही तोड़ पाया।
वहीं अगले मंगलवार फिर व्यापारी शाम को दुकान मंगल कर डेलनपुर जाने को तैयार हुए। इस बार व्यापारी को देख एक दो लोग और डेलनपुर जाने के लिए तैयार हो गए। पुनः अगले मंगलवार को व्यापारी डेलनपुर पहुंचे लेकिन अब भक्त 2 के 6 हो चुके थे। फिर 8 फिर 10 और धीरे धीरे भक्त जुड़ते गए और अब डेलनपुर मैं भक्तो का तांता लगना सुरु हो गया। जो पूरे नगर का ध्यान अपने और आकर्षित करता है।

बालाजी का है चमत्कार, वे कराते है सारी व्यवस्था
व्यापारी रवि बताते है कि यात्रा जो 1 से सुरू हुई थी। अब सैकड़ो की संख्या मे पहुँच गयी है। यह बाबा का ही चमत्कार है जो सारी व्यवस्था करा रहे है।ज्ञात रहे की प्रत्येक मंगलवार को नगरपालिका नगर हनुमान मंदिर से शाम 4 बजे यात्रा प्रारम्भ होती है। जो महिदपुर नाके से डीजे व बालाजी के भजनों के साथ सुशोभित हो जाती है। जहाँ मार्ग मैं कई भक्त जन द्वारा यात्री का स्वगात व स्वल्पाहार की व्यवस्था की जाती है।
जहाँ रोल ग्राम होते हुए यात्रा डेलनपुर मंदिर पहुँचती है। मंदिर मे भजन कलाकार द्वारा अपने भजनों की प्रस्तुति दी जाती है। जहाँ भक्त अपनी दुःख परेशानी बाबा के भरोसे छोड़ भजनों मैं लीन हो जाते है। आगे बालाजी की आरती के बाद भोजन की व्यवस्था मंदिर प्रांगण मैं ही भक्तो द्वारा की जाती है। जिसके तुरंत बाद तूफान वाहन के माध्यम से भक्त अपने गंतव्य स्थान तक पहुँचते है।

ज्ञात रहे है यात्रा मैं 10 साल तक बच्चे भी शामिल हो 15 किलोमीटर की पैदल यात्रा करते है। जिनके हौसले जवानों को भी पीछे छोड़ते है जो अन्य को प्रेणा देते है कि ईश्वर के प्रति आस्था है तो कोई कार्य मुश्किल नही।
दिसम्बर तक कि भोजन की हो गयी बुकिंग
आगे व्यापारी चौहान बताते है की यह बाबा का ही चमत्कार है कि जहाँ भक्त अपनी सेवा देने के लिए बढ़ चढ़ कर आगे आ रहे है। लिहाजा दिसम्बर तक कि भोजन कराने की बुकिंग होने के बाद भी लगातार भक्तो के फ़ोन आ रहे है।
कारोबार मेरा बालाजी चलावे जिसमे कभी भी घाटा होवे ना
व्यापरी चौहान के यात्रा सुरु करने पर कई लोगो द्वारा उन्हें पागल भी समजा गया। लोगो का तर्क यहाँ तक था कि व्यापारी पागल हो चुका है। जो अपने जमे जमाये धंधे को छोड़ यात्रा के लिए दुकान बंद रखता है। जिस पर उत्तर मैं व्यापारी भी सुंदर पंक्ति उनका अभिवादन करते हुए कहते है कारोबार मेरा बालाजी चलावे जिसमे कभी भी घाटा आवे ना, मेरी बैलेंस शीट बाबा बनावे।
व्यापारी चौहान का मानना है कि जिस तरह सेना के बिना सेनापति का कोई पद नहीं होता ठीक वैसे ही भक्तो के सहयोग के बीना कोई कार्य पूरा नहीं होता। चौहान बताते है इस यात्रा को सफल बनाने मैं कई लोग सहयोग करते है जिसके फलस्वरूप यात्रा पूर्ण हो पाती है। व्यापारी चौहान ने अधिक से अधिक संख्या मे यात्रा मैं शामिल होने की अपील नगरवासियों से की है।

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