उज्जैन: उज्जैन की विक्रम उद्योगपुरी योजना से प्रभावित होने वाले 7 गांव के किसानों ने भूमि अधिग्रहण के विरोध में आज बुधवार को बड़ा विरोध प्रदर्शन किया।
विक्रम उद्योगपुरी से 2500 की संख्या में किसान लगभग 350 ट्रैक्टर सहित अन्य वाहनों पर सवार होकर रैली के रूप में नागझिरी, तीन बत्ती चौराहा, टावर चौराहा, दशहरा मैदान होते हुए दोपहर में कलेक्टर कार्यालय पहुँचे और कलेक्टर को ज्ञापन सौपकर सभी किसानों ने इस योजना पर आपत्ति दर्ज करवाई है।
विक्रम उद्योगपुरी के द्वारा 7 गांव के 700 किसानों की 2500 बीघा जमीन अधिग्रहण के विरोध में आज कलेक्टर को ज्ञापन देने के लिए आंदोलन किया। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के महत्वाकांक्षी योजना विक्रम उद्योगपुरी अब खटाई में पड़ती हुई नजर आ रही है। किसानों ने आरोप लगाते हुए कहा कि पूर्व में एजुकेशन हब बनाएंगे और यहां पर कॉलेज, आईआईएम कॉलेज, मेडिकल कॉलेज और छात्र के रहने का रेसिडियंट बिल्डिंग डेवलप करने के नाम पर जमीन का अधिग्रहण किया गया था। किसानों के साथ छल किया और बाद में इस भूमि को एमपीआईडीसी को उद्योग क्षेत्र डेवलपमेंट के लिए दे दी। इसी का विरोध करने के लिए 7 गांव के सैकड़ो किसान ट्रैक्टर यात्रा लेकर विक्रम उद्योगपुरी से कलेक्टर कार्यालय पर पहुंचे। सभी किसान ने हाथों में तख्तियां लेकर सरकार को जमीन नही देने के नारे लगाए।
7 गांव के किसान प्रदर्शन करते हुए कलेक्टर कार्यालय पर पहुंचे। यहां पर उन्होंने कलेक्टर को ही ज्ञापन देने और उनसे चर्चा करने के लिए प्रदर्शन शुरू कर दिया। कलेक्टर के नहीं पहुंचने पर सभी किसान धरने पर बैठ गए इस दौरान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
किसान दिलीप चौधरी ने बताया कि विक्रम उद्योगपुरी के लिए अधिग्रहण होने वाली भूमि जिसमें चैनपुर हंसखेड़ी, कड़छा, नरवर, मुंजाखेड़ी, गांवड़ी, माधोपुर और पिपलोदा द्वारकाधीश के 700 किसानों की 2500 बीघा सिंचित भूमि का अधिग्रहण कर लगभग 15000 लोगों को बेघर किया जा रहा है।
सरकार ने किसानों को यह कहा था कि यहां पर एजुकेशन हब बनाएंगे और यहां पर कॉलेज, आईआईएम कॉलेज, मेडिकल कॉलेज और छात्र के रहने का रेसिडियंट बिल्डिंग डेवलप करेंगे लेकिन ऐसा नहीं किया। किसानों के साथ छल किया और बाद में इस भूमि को एमपीआईडीसी को उद्योग क्षेत्र डेवलपमेंट के लिए दे दी। जिसका समस्त किसान घोर विरोध कर रहे हैं। प्रशासन ने सूचना की तारिख 3 सितंबर के आधार पर धारा 15 ;1द्ध के अधीन 60 दिन में आपत्ति का समय दिया था। उसके अनुसार समस्त 700 किसानों में से 680 किसानों ने 7 अक्टूबर को कलेक्टर कार्यालय के भू-अर्जन विभाग में अप्पति दर्ज करवा दी है, जो टोटल भूमि की 96 प्रतिशत आपत्ति है।

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