हाल ही में कनाडा को दो टुकड़ों में बांटने की मांग को लेकर अल्बर्टा प्रांत में एक जनमत संग्रह (Referendum) कराया गया था, जिसमें भारतीय मूल के नागरिकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए कनाडा के पक्ष में मतदान किया था और देश को टूटने से बचा लिया था। हालांकि, अब जो रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं, उनके अनुसार अल्बर्टा प्रांत में भारतीय प्रवासियों और बाहरी लोगों की एंट्री पर बैन लगाने की तैयारी चल रही है। ब्रिटिश अखबार ‘द गार्जियन’ के मुताबिक, सरकार ने जनमत संग्रह के दौरान आव्रजन से जुड़े उस सवाल पर गौर किया है, जिसमें अधिकांश स्थानीय नागरिकों ने बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की है।
📊 32 हजार भारतीय मूल के लोग हैं अल्बर्टा में: स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं पर बढ़ते खर्च का दिया जा रहा हवाला
प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, अल्बर्टा में भारतीय मूल के लगभग 32,000 लोग निवास करते हैं, जो हाल ही में आए प्रवासियों का करीब 16 प्रतिशत हिस्सा हैं। स्थानीय अलगाववादियों का तर्क है कि अस्थायी प्रवासियों से राज्य को टैक्स के रूप में लगभग 150 मिलियन डॉलर का फायदा जरूर होता है, लेकिन हेल्थ, एजुकेशन और अन्य सामाजिक सेवाओं पर सरकार को हर साल 1 बिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। यही वजह है कि अब इमिग्रेशन का मुद्दा उठाकर प्रवासियों के प्रवेश को रोकने की मांग जोर पकड़ रही है, जिससे वहां रह रहे भारतीय समुदाय के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

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